सुप्रीम कोर्ट ने रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने पर केंद्र को नोटिस जारी किया

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता शामिल हैं, ने केंद्र को चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। स्वामी ने अपनी याचिका में 19 जनवरी 2023 के आदेश का हवाला दिया, जब कोर्ट ने केंद्र से रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने पर विचार करने को कहा था।

स्वामी ने दावा किया है कि रामसेतु न केवल पुरातात्विक स्थल है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और पुरातात्विक अध्ययन यह संकेत देते हैं कि यह संरचना मानव निर्मित है। इसके संरक्षण के लिए उन्होंने मांग की है कि संस्कृति मंत्रालय उनके प्रतिनिधित्व पर शीघ्र और समयबद्ध निर्णय ले।

रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग पहली बार स्वामी ने 2007 में की थी। यह याचिका सेतु समुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ थी, जिसमें 83 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की योजना थी। परियोजना से रामसेतु को नुकसान पहुंचने का खतरा था, इसलिए स्वामी ने इसकी सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की मांग की।

रामसेतु भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चूने की उथली चट्टानों की 48 किलोमीटर लंबी चेन है। इसे दुनियाभर में एडम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि 15वीं शताब्दी तक इसे पार करके रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन तूफानों के कारण यह समुद्र में डूब गया। 1993 में नासा ने सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं, जिसमें इसे मानव निर्मित पुल बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र को नोटिस जारी कर इस विवादित मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगा है, ताकि रामसेतु के संरक्षण और राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

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