सुप्रीम कोर्ट: मानसिक रूप से कमजोर बेटे की कस्टडी अमेरिकी मां को सौंपी, पिता को दिया यह आदेश

सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में मानसिक रूप से कमजोर युवक की कस्टडी उसकी अमेरिकी नागरिक मां को देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह निर्णय इस आधार पर लिया कि युवक के मानसिक विकास में गंभीर कमी है, और वह खुद से निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। अदालत ने कहा कि इस युवक को उसके हित में अमेरिका ले जाने की अनुमति दी जाती है, क्योंकि वह सेरेब्रल पाल्सी नामक बीमारी से पीड़ित है, जिससे उसका मानसिक विकास अवरुद्ध है और वह आठ से 10 साल के बच्चे के स्तर पर काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्जल भुइयां शामिल थे, ने इस मामल की सुनवाई की। पीठ ने यह भी कहा कि युवक के पिता को यह आदेश दिया गया है कि वह उसे अपनी मां के साथ अमेरिका लौटने से न रोकें। इसके साथ ही कोर्ट ने युवक को निमहान्स, बेंगलुरु में चिकित्सा मूल्यांकन से गुजरने का निर्देश दिया था, और विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि उसकी मानसिक स्थिति काफी कमजोर है।
यह मामला मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। हाईकोर्ट ने पहले यह फैसला सुनाया था कि युवक को अवैध रूप से बंधक नहीं रखा गया था, लेकिन उसकी मां, शर्मिला वेलामुर ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके तलाक के बाद, जब उनके बेटे की कस्टडी और मध्यस्थता की कार्यवाही चल रही थी, तो उनके पति ने उसे अमेरिका से लेकर चेन्नई आ गए थे और उनका संपर्क टूट गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार करते हुए वेलामुर को 15 दिन के भीतर अपने बेटे के साथ अमेरिका लौटने का निर्देश दिया और पिता को आदेश दिया कि वह इस प्रक्रिया में कोई रुकावट उत्पन्न न करें। अदालत ने युवक की दिव्यांगता के स्तर को गंभीर बताते हुए यह फैसला लिया, जो उसकी मां के पक्ष में था।





