Station Closed: बिलासपुर स्टेशन रिडेवलपमेंट ठप, ठेकेदार CBI कस्टडी में,प्रोजेक्ट ठप,रेलवे के दावों पर सवाल….
Station Closed: कागजो में विकास,मैदान में सन्नाटा- बिलासपुर स्टेशन बना यात्रियों की मुसीबत...

बिलासपुर रेलवे स्टेशन का रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट… कागज़ों में शानदार, लेकिन ज़मीन पर बिल्कुल ठप रेलवे का दावा है। (Station Closed) काम चल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि स्टेशन का बाहरी हिस्सा जनवरी से बैरिकेडिंग कर बंद पड़ा है… और उस बैरिकेडिंग के पीछे न कोई मजदूर दिखता है, न मशीनरी, न ही किसी तरह की गतिविधि। नतीजा—यात्री परेशान, राहगीर परेशान…और काम सिर्फ कागज़ों पर आगे बढ़ रहा है।
CPRO बोले-काम चल रहा है,जमीनी हकीकत बोली-कुछ नहीं चल रहा….
बिलासपुर स्टेशन के आउट साइड एरिया को लगभग एक साल से घेरकर रख दिया गया है। (Station Closed) रोज़ाना यात्रियों को एंट्री और एग्ज़िट में भारी जाम का सामना करना पड़ता है। भीड़, अव्यवस्था और परेशानी लगातार बढ़ रही है, लेकिन काम का नामोनिशान नहीं।लोगों का कहना है।स्टेशन का रास्ता तो बंद कर दिया गया, लेकिन काम शुरू ही नहीं हुआ। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट का ठेका संभालने वाले ठेकेदार झाझरिया इस समय CBI कस्टडी में हैं।
ठेकेदार CBI कस्टडी में,प्रोजेक्ट ठप,रेलवे के दावों पर सवाल….(Station Closed)
ठेकेदार के कस्टडी में जाने के बाद से रिडेवलपमेंट का काम पूरी तरह ठप हो गया है। जनवरी से साइट बंद है… लेकिन रेलवे की तरफ से प्रोजेक्ट की कोई अपडेट नहीं।हालाकि रेलवे के CPRO लगातार दावा करते हैं कि काम जारी है, लेकिन वे ज़मीनी हकीकत से अनजान हैं या जानबूझकर गुमराह कर रहे हैं। कागज़ों में काम चल रहा हो सकता है… पर मैदान में नहीं।रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह एक मेज़र रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट है। इसमें डिज़ाइन, अप्रूवल, प्लानिंग और टेक्निकल क्लियरेंस जैसी लंबी प्रक्रियाएं शामिल हैं, इसलिए समय लग रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है।अगर काम सच में चल रहा है, तो बंद पड़ी साइट पर हलचल क्यों नहीं?
जनवरी से बैरिकेडिंग,पर काम ज़ीरो….
यात्री पूछ रहे हैं क्या ठेकेदार की CBI कस्टडी की वजह से काम पूरी तरह रुक गया है? बैरिकेडिंग कब हटेगी?स्टेशन का रिडेवलपमेंट आखिर जमीन पर कब दिखाई देगा?और सबसे जरूरी- यात्रियों की ये परेशानी कौन कम करेगा?बिलासपुर स्टेशन का रिडेवलपमेंट फिलहाल सिर्फ सपना बनकर रह गया है। एक तरफ ठेकेदार कस्टडी में, दूसरी तरफ रेलवे के दावे हवा में… और बीच में फंस गए हैं यात्री, जिन्हें हर दिन मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। अब नजरें इस बात पर हैं कि रेलवे कब जागेगा…और कब ये मेगा प्रोजेक्ट कागज़ से निकलकर जमीन पर उतरना शुरू होगा।





