A Pile Of Garbage: जूना बिलासपुर नदी तट पर गंदगी का विस्फोट,निगम के दावों की पोल खुली….
A Pile Of Garbage: कई करोड़ खर्च…लेकिन नदी किनारे कचरे के पहाड़,सफाई व्यवस्था सवालों में....

न्यायधानी बिलासपुर का सबसे बड़ा विसर्जन स्थल,जूना बिलासपुर नदी तट। (A Pile Of Garbage) ठीक बगल में निर्माणाधीन बैराज…और उसके पास फैली गंदगी की ऐसी तस्वीर, जिसे देखकर कोई भी दंग रह जाए। कूड़े के ढेर, दुर्गंध का अंबार और मवेशियों की आवाजाही यहां हालात इतने खराब हैं कि स्थानीय लोग अब जनस्वास्थ्य पर सीधा खतरा महसूस कर रहे हैं।
शहर की सफाई का ठेका,पर गंदगी नदी किनारे कौन जिम्मेदार? (A Pile Of Garbage)
यह वही जगह है,जिसके लिए नगर निगम दावा करता है कि हर महीने 9 से 10 करोड़ रुपये सफाई पर खर्च किए जाते हैं। दिल्ली की लायन्स सर्विसेज और रामकी एमएसडब्ल्यू जैसी बड़ी कंपनियों को सफाई का ठेका दिया गया था… वादा किया गया था कि शहर में कागज तक नजर नहीं आएगा। लेकिन जूना बिलासपुर में हकीकत बिल्कुल उलटी है।
कूड़े के पहाड़ हैं, बदबू है और सफाई का नामोनिशान तक नहीं। पचरीघाट निवासी प्रिया विश्वकर्मा कहती हैं।नगर निगम की गाड़ियां भी यहां कचरा डालती हैं। शादी-पार्टियों का बचा खाना और गंदगी सब यहीं फेंकी जाती है। बदबू से जीना मुश्किल है।वहीं प्रेमलाल कैवर्त का आरोप है।निगम का ट्रैक्टर रोज आता है, कचरा डालता है और चला जाता है। घरों के बीच इतनी गंदगी…अगर हम बीमार पड़े तो जिम्मेदार कौन?
न्यायधानी में गंदगी का नर्क,जूना बिलासपुर का हाल चिंताजनक….
सबसे चौंकाने वाली बात पास ही निगम का जोन कार्यालय मौजूद है, जिसका उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान बताकर दिखाया गया था। (A Pile Of Garbage) लेकिन महीनों से यहां पड़ा कचरा बताता है कि सफाई व्यवस्था पर किसी की निगरानी ही नहीं है।जूना बिलासपुर का ये हाल नगर निगम की सफाई व्यवस्था, ठेका कंपनियों की कार्यप्रणाली और निगरानी सिस्टम तीनों की पोल खोल रहा है।अब सवाल यही है।कई करोड़ रुपये आखिर जा कहां रहे हैं?और शहर को गंदगी से कौन बचाएगा?





