जादू-टोना के शक में परिवार पर बर्बर हमला, हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

जादू-टोना के संदेह में एक ही परिवार के तीन लोगों के साथ हुई अमानवीय मारपीट और अपमान के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने न्यायिक आदेशों का पालन न करने और निष्पक्ष जांच में लापरवाही को गंभीर मानते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

अदालत की डिवीजन बेंच ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की रिपोर्ट शपथपत्र के साथ प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।

घटना में ग्रामीणों ने एक व्यक्ति पर जादू-टोना करने का आरोप लगाकर पहले उसकी पिटाई की। जब उसके पिता और भाई बचाने पहुंचे तो भीड़ ने तीनों को निशाना बनाया। उन्हें बुरी तरह पीटा गया, अर्धनग्न कर गांव में घुमाया गया, चेहरे पर कालिख पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। तीनों को रातभर बंधक बनाकर रखा गया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि पीड़ितों की शिकायत दर्ज करने के बजाय उनसे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए और उन्हें छोड़ दिया गया। बाद में पीड़ितों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

निचली अदालत ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया। इस पर पीड़ित पक्ष ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे भीड़ हिंसा से जुड़ा बताया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस स्तर पर चूक हुई है, जिसके चलते विभागीय जांच शुरू की गई है।

मामले में संबंधित थाना प्रभारी और एक अन्य अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक अपमान और भीड़ हिंसा जैसे मामलों में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है।

अदालत ने याचिका का आंशिक निपटारा करते हुए पुलिस अधिकारियों के आचरण से जुड़े पहलुओं को लंबित रखा है और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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