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रायपुर में 32 करोड़ के मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश, तीन पटवारी गिरफ्तार, पांच अधिकारी फरार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम के बीच निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 32 करोड़ रुपए के घोटाले में शामिल तीन पटवारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच अधिकारी अब भी फरार हैं। गिरफ्तारी पर लगी रोक हटते ही मंगलवार देर रात आठ स्थानों पर छापेमारी की गई।

जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार पटवारी दिनेश पटेल, लेखराज देवांगन और बसंती धृतलहरे पर नायकबांधा, भेलवाडीह और टोकरो गांवों की जमीनों में फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। इन तीनों ने किसानों की जमीनों को कई टुकड़ों में बांटकर फर्जी नामांतरण किए और बैक डेट में दस्तावेज तैयार कर एसडीएम से मुआवजा प्रकरण पास कराया। आरोप है कि इनकी मिलीभगत से लगभग 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हड़पी गई।

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि आरोपी पटवारियों ने 2020 के पहले की तारीखों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर एनएचएआई से दो से तीन गुना अधिक मुआवजा प्राप्त किया। इसमें महासमुंद निवासी प्रॉपर्टी डीलर हरमीत खनूजा, कारोबारी विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी की भूमिका भी पाई गई। बताया जा रहा है कि हरमीत की पत्नी भी तहसीलदार है और उसने भी इस साजिश में सहयोग किया।

आरोपियों ने किसानों को मुआवजा न मिलने का डर दिखाकर उनके हस्ताक्षर ब्लैंक चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर लिए, फिर आईसीआईसीआई बैंक में खाते खुलवाकर रकम निजी संस्थाओं में जमा कर बांट ली। फिलहाल पांच अधिकारी — तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, आरआई रोशन लाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण और पटवारी जितेंद्र साहू — फरार हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि पहले से मुआवजा दी जा चुकी डूबान क्षेत्र की जमीन का दोबारा भुगतान कराया गया। एक ही जमीन के कई हिस्से बनाकर अलग-अलग किसानों के नाम पर रजिस्ट्री कराई गई और करोड़ों का फर्जी भुगतान हुआ।

ईओडब्ल्यू अब मामले में तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की भी जांच कर रही है, क्योंकि मुआवजा पास करने का अधिकार उन्हीं के पास था। एजेंसी का मानना है कि एसडीएम के जरिए रकम ऊपर तक पहुंचाई गई। जांच में चार पूर्व कलेक्टरों की संलिप्तता की भी जांच जारी है।

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