महिला आरक्षण बिल पर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज, विशेष सत्र की तैयारी और विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्य सरकार इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में आयोजित जनआक्रोश रैली के दौरान विपक्ष के रुख की निंदा करते हुए प्रस्ताव लाने की बात कही।

विशेष सत्र बुलाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकती है। इसके लिए पहले कैबिनेट में प्रस्ताव पारित होगा और फिर राज्यपाल की मंजूरी के बाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।

प्रदेशभर में आंदोलन का ऐलान
महिला आरक्षण बिल पारित न होने के विरोध में भाजपा ने प्रदेशभर में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। 20 अप्रैल से आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। 23 और 24 अप्रैल को जन आक्रोश महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। रैलियों में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिल रही है।

महिला आरक्षण बिल पास न होने पर आरोप-प्रत्यारोप
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। पारित होने के लिए 352 वोट जरूरी थे। इस बिल में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव था। प्रधानमंत्री ने बिल पास न होने पर देश की महिलाओं से माफी मांगी और विपक्षी दलों पर राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। वहीं, राज्य सरकार और भाजपा नेताओं ने भी विपक्ष पर महिलाओं की उम्मीदें तोड़ने का आरोप लगाया है।

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