छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई, कर्मचारियों को मिलेगा वर्क फ्रॉम होम

बिलासपुर। भीषण गर्मी और संसाधनों की बचत को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के निर्देश पर समर वेकेशन के दौरान अदालत की सुनवाई सामान्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करने का फैसला लिया गया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वकीलों और पक्षकारों को हर मामले में कोर्ट पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे लोगों को भीषण गर्मी में राहत मिलने के साथ समय और खर्च दोनों की बचत होगी। हाईकोर्ट का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुए बिना लोगों को अधिक सुविधा मिल सकेगी, खासकर दूरदराज के इलाकों से आने वाले पक्षकारों को राहत मिलेगी।
सर्कुलर के मुताबिक समर वेकेशन के दौरान अधिकतर मामलों की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। हालांकि जिन वकीलों को तकनीकी कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में परेशानी होगी, उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर कोर्ट खुद भी किसी मामले में फिजिकल सुनवाई के निर्देश दे सकेगा।
हाईकोर्ट और जिला अदालतों के कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की तैयारी भी की गई है। इसके लिए रोटेशन सिस्टम लागू होगा ताकि कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहें और कामकाज प्रभावित न हो। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को सरकारी संचार माध्यमों पर हर समय उपलब्ध रहना होगा।
इसके अलावा ईंधन बचाने के लिए न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अफसरों और कर्मचारियों के लिए कार पूलिंग व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हाईकोर्ट प्रशासन का कहना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और आम लोगों तक न्याय व्यवस्था को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।





