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धान खरीदी में बड़ी गड़बड़ी: रजिस्ट्रेशन ‘निरंक’, 10 दिन से परेशान किसान

बिलासपुर। प्रदेश में 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी का पहला हफ्ता ही किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। कई किसान अब तक अपनी फसल बेच नहीं पा रहे हैं, क्योंकि एग्रीकल्चर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की गड़बड़ी के कारण उनका रकबा ‘निरंक’ यानी शून्य दिख रहा है।

किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर रजिस्ट्रेशन कराया, सभी जरूरी दस्तावेज भी अपलोड किए, लेकिन सिस्टम उनकी जमीन का रकबा नहीं दिखा रहा। इस वजह से न तो उनका नाम खरीदी सूची में आ रहा है और न ही वे धान बेच पा रहे हैं। मजबूर होकर किसान रोज़ दफ्तरों और खरीदी केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।

समस्या से परेशान दर्जनों किसान शुक्रवार को कलेक्टर ऑफिस पहुंचे और अपनी परेशानियां बताईं। किसानों का आरोप है कि सरकार पारदर्शिता के बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सिस्टम पूरी तरह फेल है। मेहनत से उगाई फसल बेचने के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।

इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी अमित कुजूर ने बताया कि एग्रीकल्चर मॉड्यूल फूड विभाग के माध्यम से चलता है और रजिस्ट्रेशन डेटा अपडेट होने में 24 से 48 घंटे का समय लगता है। उनका दावा है कि समय पूरा होते ही किसानों का रकबा दिखने लगेगा।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब किसान 10 दिन से परेशान हैं, तो यह देरी आखिर किसकी जिम्मेदारी है? किसानों की मेहनत और उनकी सालभर की कमाई इसी खरीदी पर निर्भर करती है। ऐसे में रकबा अपडेट न होना उनके लिए चिंता की बड़ी वजह बन गया है।

अब पूरा मामला जिला प्रशासन के पाले में है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि विभाग जल्द समाधान निकालेगा, ताकि वे बिना परेशान हुए अपनी फसल बेच सकें और दफ्तरों के चक्कर लगाने से निजात मिले।

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