NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं तो क्या होगा? जानिए चुनाव नियम

भारत । चुनाव में ईवीएम पर दिखाई देने वाला NOTA (None of the Above) वोटरों को ‘राइट टू रिजेक्ट’ का विकल्प देता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि अगर किसी सीट पर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं तो क्या चुनाव रद्द हो जाएगा या दोबारा मतदान होगा?
NOTA क्या है?
NOTA की शुरुआत 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई थी, ताकि वोटर सभी उम्मीदवारों को नकार सकें और अपनी असहमति दर्ज कर सकें। इसका उद्देश्य राजनीतिक दलों को बेहतर उम्मीदवार उतारने के लिए प्रेरित करना है।
अगर NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं तो क्या होगा?
- NOTA कोई उम्मीदवार नहीं होता, सिर्फ एक विकल्प है।
- कानून के अनुसार, सबसे ज्यादा वैध वोट पाने वाला उम्मीदवार ही विजेता घोषित होता है।
- अगर NOTA पहले स्थान पर भी आ जाए, तब भी दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार जीत जाएगा और वही MLA/MP बनेगा।
कानूनी स्थिति क्या कहती है?
- रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार NOTA केवल प्रतीकात्मक विकल्प है।
- PUCL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2013) केस में सुप्रीम कोर्ट ने NOTA को वोटरों की अभिव्यक्ति का अधिकार माना, लेकिन चुनाव रद्द करने का प्रावधान नहीं दिया।
क्या कभी दोबारा चुनाव होता है?
कुछ राज्यों (जैसे पंचायत या नगर निकाय चुनाव) में नियम अलग हैं, जहां NOTA जीतने पर पुनर्मतदान कराया जा सकता है। लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अभी ऐसा नियम लागू नहीं है।
नियम बदलने की मांग
- NOTA जीतने पर चुनाव रद्द हो
- पुराने उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोका जाए
- नए उम्मीदवारों के साथ पुनर्मतदान कराया जाए
फिलहाल, NOTA केवल जनता की नाराजगी और असहमति का संकेत है। सरकार या उम्मीदवार चुनने पर इसका सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन यह राजनीतिक दलों के लिए एक मजबूत संदेश जरूर देता है कि मतदाता बेहतर विकल्प चाहते हैं।





