बीमार पड़ा खैरागढ़ का सिविल अस्पताल: न सुविधाएं, न डॉक्टर, मरीज बेहाल

खैरागढ़, छत्तीसगढ़ |
जिला मुख्यालय खैरागढ़ का एकमात्र सिविल अस्पताल, जो वर्ष 1936 में अंग्रेजों के शासनकाल में बना था, आज खुद बीमार हो चला है। हजारों ग्रामीणों की उम्मीद बने इस सरकारी अस्पताल की हालत दिन-ब-दिन जर्जर और चिंताजनक होती जा रही है।
अस्पताल में बदहाल व्यवस्थाएं
35 बिस्तरों वाला यह अस्पताल रोजाना सैकड़ों मरीजों का इलाज करता है, लेकिन यहां की स्थिति बेहद दुखद है:
अस्पताल में साफ-सफाई नहीं है।
डॉक्टरों की भारी कमी है।
आवश्यक मेडिकल उपकरण या तो उपलब्ध नहीं हैं या फिर खराब हो चुके हैं।
एक्स-रे के लिए अभी भी पुरानी मशीन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोनोग्राफी जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं है।
इलाज के अभाव में मरीज लौटे निराश
हाल ही में एक मामला सामने आया जब एक ग्रामीण अपनी गर्भवती पत्नी को इलाज के लिए इस अस्पताल लाया, लेकिन सुविधा न होने के चलते उसे छुईखदान के अस्पताल जाना पड़ा। ऐसे कई मरीज हैं जिन्हें बेहतर इलाज के लिए अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है।
जानलेवा हो चुकी है इमारत
अस्पताल की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब वहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की जान पर भी बन आई है। पानी रिसाव, टूटती दीवारें, बिजली की असुरक्षित वायरिंग जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
क्या बोले सीएचएमओ?
सीएचएमओ आशीष शर्मा ने बताया:
“सिविल अस्पताल खैरागढ़ की हालत को देखते हुए शासन को नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जब तक नया भवन नहीं बनता, तब तक स्थानीय प्रशासन और जनता की मदद से रिपेयरिंग का काम जारी रहेगा।”
जिला दर्जा लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं ‘प्राथमिक’ स्तर की
खैरागढ़ को जिला बनाए जाने के वर्षों बाद भी यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं प्राथमिक स्तर पर ही अटकी हुई हैं। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को भी उजागर करती है।





