हाई कोर्ट:परिवार में पहले से सरकारी नौकरी हो तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं

बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी एक याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि मृतक शासकीय सेवक के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

यह फैसला जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनाया। मामला सूरजपुर में पदस्थ आरक्षक (चालक) युवराज सिंह से जुड़ा है, जिनकी 18 दिसंबर 2018 को सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी पार्वती बाई ने अपने पुत्र मयंक के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी।

सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक ने 4 अक्टूबर 2019 को आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मयंक की मां पहले से पंचायत शिक्षिका के रूप में स्कूल शिक्षा विभाग में सरकारी सेवा में हैं और उनका संविलियन भी हो चुका है।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पुलिस विभाग में नियुक्तियां छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन के नियम 60 के तहत होती हैं, इसलिए सामान्य प्रशासन विभाग का वह नियम यहां लागू नहीं होना चाहिए, जो परिवार में सरकारी कर्मचारी होने पर अनुकंपा नियुक्ति रोकता है।

वहीं राज्य सरकार ने कहा कि शिक्षा विभाग भी राज्य शासन का ही हिस्सा है, इसलिए अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि 29 अगस्त 2016 के सर्कुलर का नियम 60 बाल अर्दली की नियुक्ति में प्राथमिकता की बात करता है, लेकिन इसका अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता से सीधा संबंध नहीं है। चूंकि याचिकाकर्ता की मां पहले से नियमित सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

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