गीता रोज के जीवन में पथ प्रदर्शक, ये सिर्फ बुढ़ापे में पढ़ने वाला ग्रंथ नहीं : भागवत

बेंगलुरु। कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गीता को रोज के जीवन का पथ प्रदर्शक बताया है। उन्होने कहा कि गीता को बचपन से ही पढ़ना चाहिए, यह बुढ़ापे में पढ़ने का ग्रंथ नहीं हैं।
आरएसएस प्रमुखने इस दौरान मठ के सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामी से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, “सनातन काल से जो चिंतन हैं, वह पूर्णता तक पहुंचा है। उस चिंतन का सारांश गीता है। आध्यात्मिक चिंतन का गीता में समावेश है।
जनसंख्या बयान पर हुई थी चर्चा
आरएसएस प्रमुख ने बीते दिनों जनसंख्या को लेकर बयान जारी किया था। इस बयान की काफी चर्चा हुई थी। भागवत ने अपने बयान में परिवार के महत्व पर जोर दिया था और कहा था कि अगर किसी समाज की जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा। उन्होने कहा कि हमारे देश की जनसंख्या नीति, जो 1998 या 2002 के आसपास तय की गई थी, कहती है कि जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे नहीं होनी चाहिए। हमें दो से अधिक अर्थात तीन (जनसंख्या वृद्धि दर) की आवश्यकता है, यही जनसंख्या विज्ञान कहता है।





