भारत के चार अनोखे मंदिर जहां महिलाएं पीरियड्स में भी कर सकती हैं पूजा, देवी की मान्यताओं से जुड़ी रोचक परंपराएं

भारत में कई मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं, मान्यताओं और रहस्यमयी इतिहास के कारण अलग पहचान रखते हैं। जहाँ आमतौर पर हिंदू धर्म में मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ को वर्जित माना जाता है, वहीं कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां महिलाओं को पीरियड्स में भी पूजा, अनुष्ठान और गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति होती है। इन मंदिरों की विशेषता यह है कि पूजा से लेकर पूरे अनुष्ठान की जिम्मेदारी केवल महिलाएँ निभाती हैं।
1. मां लिंग भैरवी मंदिर, कोयंबटूर
कोयंबटूर से करीब 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित मां लिंग भैरवी मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पूजा और अनुष्ठान केवल महिलाएँ ही करती हैं और मासिक धर्म के दौरान भी प्रवेश या पूजा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। मंदिर में देवी की प्रतिमा के स्थान पर एक चपटा लंबा पत्थर पूजनीय है। गर्भगृह में पूजा करने वाली महिला पुजारियों को ‘भैरागिनी’ कहा जाता है। मंदिर परिसर की दीवारों पर बना त्रिकोण स्त्री-ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
2. चक्कुलाथुकावु मंदिर, केरल
दक्षिणी केरल में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर महिलाओं की पूजा परंपरा के लिए जाना जाता है। पोंगल उत्सव के दौरान 10-11 दिनों तक केवल महिलाएँ ही पूजा-अर्चना करती हैं। इस दौरान पुरुषों का मंदिर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। इसी कारण इसे ‘महिलाओं का सबरीमाला’ भी कहा जाता है।
3. मन्नारसला नागराज मंदिर, अलप्पुझा
केरल के अलप्पुझा जिले में स्थित यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है। मंदिर की देखरेख और पूजा की जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है। यहाँ की मुख्य पुजारिन को ‘मन्नारसला अम्मा’ कहा जाता है। मान्यता है कि नागराज के आशीर्वाद से एक ब्राह्मण महिला को नाग के समान पुत्र प्राप्त हुआ था। तभी से यह परंपरा महिलाओं के हाथों में चली आ रही है।
4. कुमारी अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी
तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित कुमारी अम्मन मंदिर अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहाँ देवी के कुमारी स्वरूप की पूजा की जाती है। गर्भगृह में सिर्फ महिलाओं को ही प्रवेश की अनुमति है, वहीं पुरुषों के प्रवेश पर सीमित प्रतिबंध लागू होते हैं। यह मंदिर ब्रह्मचर्य और संन्यास की दीक्षा स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है।





