पशुओं की हिरासत के नियम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली। पशुओं की हिरासत और जब्ती से जुड़े नियमों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है।

पशुओं की हिरासत से संबंधित नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला पशुओं की जब्ती और स्वामित्व से जुड़े प्रावधानों को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों से जुड़ा हुआ है।

मामले की सुनवाई विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने की। पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और उनसे इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने को कहा।

याचिका में पशु क्रूरता निवारण नियम, 2017 के नियम 3 को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, विशेष रूप से धारा 29 के विरुद्ध घोषित करने और परिणामस्वरूप इसे असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है। धारा 29 के तहत अदालत को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर पशुओं के स्वामित्व से वंचित कर सकती है।

याचिका में कहा गया है कि नियम 3 के तहत दोषसिद्धि से पहले ही पशुधन की जब्ती, उसका हस्तांतरण या स्वामित्व से स्थायी रूप से वंचित करना संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 300ए के विपरीत है।

अनुच्छेद 300ए के अनुसार किसी भी व्यक्ति को कानून की प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि इस नियम को असंवैधानिक घोषित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई बाद में तय की जाएगी।

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