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बदल गया युद्ध का मैदान: दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे ड्रोन, जानिए रिवर्स इंजीनियरिंग की दिलचस्प कहानी

दिल्ली। दुनिया में आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव हो या रूस-यूक्रेन युद्ध, इन संघर्षों में मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन सबसे प्रभावी हथियार बनकर उभरे हैं।

ल गया युद्ध का मैदान: दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे ड्रोन, जानिए रिवर्स इंजीनियरिंग की दिलचस्प कहानीखासतौर पर ईरान के शाहेद ड्रोन ने युद्ध की रणनीति को नई दिशा दी है। दिलचस्प बात यह है कि इन ड्रोन के पीछे रिवर्स इंजीनियरिंग की एक लंबी कहानी छिपी है, जिसने वैश्विक सैन्य तकनीक की दौड़ को और तेज कर दिया है।

ड्रोन युद्ध की इस कहानी की शुरुआत 2007 में हुई, जब अमेरिका ने अपनी वायुसेना में स्टेल्थ सर्विलांस ड्रोन RQ-170 सेंटिनल को शामिल किया। लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित यह ड्रोन दुश्मन के हवाई क्षेत्र में बिना नजर आए घुसकर जासूसी और निगरानी के लिए बनाया गया था। अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सेना इसका इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने के लिए करती थी।

1 दिसंबर 2011 को कंधार एयरफील्ड से मिशन पर उड़ा यह ड्रोन वापस बेस पर नहीं लौटा और ईरान के अंदर जा गिरा। कुछ दिनों बाद ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी स्टेल्थ ड्रोन को अपने कब्जे में ले लिया है। अमेरिका ने भी स्वीकार किया कि उसका एक ड्रोन ईरान के पास खो गया है। यहीं से रिवर्स इंजीनियरिंग की कहानी शुरू हुई।

ईरान ने इस ड्रोन के डिजाइन और तकनीक का अध्ययन कर अपने स्वदेशी ड्रोन विकसित करने का दावा किया। बाद के वर्षों में ईरान ने शाहेद-171, सिमार्ग और साएघेह जैसे ड्रोन विकसित किए, जो देखने में RQ-170 जैसे ही लगते हैं। इन ड्रोन में प्रिसिजन गाइडेड बम ले जाने और एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता बताई गई।

आज ईरान का शाहेद-136 ड्रोन दुनिया के सबसे चर्चित हमलावर ड्रोन में शामिल है। यह एक सस्ता लेकिन बेहद प्रभावी आत्मघाती ड्रोन है, जिसका इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर किया।

अब इस तकनीक का चक्र उलटा चल रहा है। अमेरिकी सेना ने भी शाहेद-136 से प्रेरित कम लागत वाला नया ड्रोन विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक और रिवर्स इंजीनियरिंग आने वाले समय में युद्ध की दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

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