बालको में पहले चिमनी गिरी, अब सक्ती प्लांट में बॉयलर फटा: लगातार हादसों पर उठे सवाल

कोरबा/बिलासपुर। प्रदेश में बड़े औद्योगिक संयंत्रों में लगातार हो रहे हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बालको में 2009 का चिमनी हादसा अभी भी लोगों के जहन में ताजा है, वहीं हाल ही में सक्ती स्थित प्लांट में बॉयलर फटने की घटना ने एक बार फिर लापरवाही की आशंका को हवा दी है। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है।
2009 में भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको) प्लांट में निर्माणाधीन चिमनी गिरने से 40 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक माना जाता है। इसके बाद भी समय-समय पर बड़े संयंत्रों में हादसे सामने आते रहे हैं। हालिया सक्ती प्लांट हादसे ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती जा रही।

इसी बीच बालको चिमनी हादसे में गवाह को प्रभावित करने की साजिश का बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस ने अहम गवाह पृथ्वीनाथ सिंह को आरोपी सगामसेट्टी व्यंकटेश के साथ एक होटल से बरामद किया है। मामला हाईकोर्ट के निर्देश पर सुनवाई में है। पहले से ही आरोप लगते रहे हैं कि गवाहों को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।
पुलिस जांच में सामने आया कि गवाह को होटल में छिपाकर रखा गया था और उससे संपर्क बनाए रखा जा रहा था। आरोपी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने इस साजिश को उजागर किया है। पुलिस ने सभी साक्ष्य न्यायालय में पेश कर दिए हैं।
लगातार हो रहे हादसों और अब गवाहों को प्रभावित करने जैसी घटनाओं ने कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि बड़े उद्योगों में सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर गंभीरता की कमी है, जिसका खामियाजा मजदूरों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ता है। अब देखना होगा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से क्या सख्त कदम सामने आते हैं।





