सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिर्फ कागजों तक सीमित! ज़िंदगियों से हो रहा खिलवाड़

बिलासपुर, छत्तीसगढ़|
लखनऊ के एक अस्पताल में लगी भीषण आग की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लेकिन क्या हम इससे कुछ सीखे? शायद नहीं! क्योंकि बिलासपुर के सिम्स, जिला अस्पताल और शिशु भवन जैसी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में फायर सेफ्टी को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक है।

हीटवेव के दौर में फायर सेफ्टी कोई विकल्प नहीं, ज़रूरत है!
भीषण गर्मी के इस मौसम में, अस्पतालों में आग से बचाव की व्यवस्था जान बचाने की बुनियादी शर्त है, लेकिन ज़मीनी हकीकत डराने वाली है:

कई जगहों पर अग्निशमन यंत्र धूल से अटे पड़े हैं
अधिकांश यंत्रों की वैधता खत्म हो चुकी है
कई स्थानों पर फायर एक्सटिंग्विशर हैं ही नहीं
कोई अलार्म सिस्टम, न संकेतक बोर्ड, न आपातकालीन ड्रिल

सिम्स में 3.57 करोड़ की फायर सिस्टम योजना अधूरी
बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में एक साल पहले ICU, NICU सहित 28 विभागों में ऑटोमेटिक फायर सिस्टम लगाने की योजना शुरू की गई थी। दस्तावेज़ों में यह काम 70% पूरा बताया गया है, लेकिन हकीकत में 30% से अधिक काम अब भी अधूरा है।

2023 में लगी थी आग, वादे हवा हो गए
साल 2023 में सिम्स के एक वार्ड में आग लगने की घटना हुई थी। उस वक़्त प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े वादे किए थे। लेकिन आज भी वही हालात हैं – वादों का धुआं अब भी अस्पताल के सिस्टम में पसरा हुआ है।

डॉ. प्रमोद तिवारी, सीएमएचओ बिलासपुर ने कहा – “फायर सेफ्टी को लेकर जल्द ही सभी अस्पतालों में ऑडिट करवाया जाएगा और जरूरी कदम उठाए जाएंगे।”

आम जनता की नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। लेकिन अफसोस की बात है कि यहां जिम्मेदारी सिर्फ कागज़ों तक सीमित है।

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