रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में मान्यता के लिए फर्जी मरीजों का खेल, सेटिंग से होता था निरीक्षण

रायपुर। रायपुर के श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) में मेडिकल कॉलेज की मान्यता पाने के लिए फर्जीवाड़ा सामने आया है।
अस्पताल में स्वस्थ लोगों को मरीज बनाकर भर्ती किया जाता था ताकि OPD और IPD की संख्या को मानकों के अनुसार दिखाया जा सके। इसके लिए पचेड़ा, तुलसी, बख्तरा जैसे गांवों से लोगों को बस से लाया जाता था। हर मरीज के नाम पर एजेंट को 200 रुपये दिए जाते थे।
कॉलेज के थर्ड और फाइनल ईयर के छात्रों को निरीक्षण टीम के सामने फैकल्टी बताया जाता था। एक अटेंडर ने बताया कि यह सब मितानिन और झोलाछाप डॉक्टरों की मदद से होता था।
गांव के युवाओं को वार्ड अटेंडेंट बना कर असल में एजेंट का काम करवाया जाता था। एनएमसी के निरीक्षण से एक हफ्ते पहले कॉलेज को जानकारी मिल जाती थी कि निरीक्षण टीम में कौन-कौन होगा। फिर दिखावे के लिए बड़ी संख्या में फर्जी मरीज भर्ती कर दिए जाते थे।

मरीज बनकर पांच बार भर्ती
पचेड़ा गांव की 70 वर्षीय महिला बताती हैं कि उन्हें मरीज बनाकर ले जाया गया और हर दिन के 150 रुपए दिए गए। वहीं, 65 वर्षीय चैतूराम ने कहा कि वे बीमार नहीं थे, फिर भी 5 बार मरीज बनकर भर्ती किए गए।
इंस्पेक्शन केवल औपचारिकता
इंस्पेक्शन टीम सिर्फ औपचारिकता निभाती थी, किसी मरीज से सवाल नहीं करती थी। आरोप है कि जांच टीम के कुछ अफसरों को हवाला के जरिए रिश्वत दी जाती थी।





