हड़ताल: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सिम्स के इंटर्न डॉक्टर हड़ताल पर, 15,900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग
इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी जारी, ओपीडी और शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रहेंगे इंटर्न डॉक्टर

बिलासपुर के छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी सिम्स में (हड़ताल) इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में केवल 15 हजार 900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जो महंगाई और उनकी 24 से 36 घंटे तक की लगातार ड्यूटी के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ, जिसके चलते उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया है। हालांकि सिम्स प्रबंधन का कहना है कि मरीजों के इलाज पर किसी तरह का बड़ा असर नहीं पड़ने दिया जाएगा.
ओपीडी और शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रहेंगे इंटर्न डॉक्टर (हड़ताल)
आपको बता दे की इस हड़ताल में 2021 बैच के प्रशिक्षु डॉक्टर शामिल हैं। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग करते हुए कहा है कि पड़ोसी और अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को उनसे कहीं अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि वे भी समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनका कहना है कि मरीजों की लगातार सेवा, लंबी ड्यूटी और बढ़ती महंगाई को देखते हुए स्टाइपेंड कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए….
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से मांग पूरी करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ। इंटर्नशिप की अवधि भी समाप्ति की ओर है, जिससे उन्हें आशंका है कि बिना किसी निर्णय के उनका प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा। डॉक्टरों ने सरकार से जल्द फैसला लेने की अपील करते हुए कहा कि उनकी मांग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सम्मानजनक प्रशिक्षण व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है…
इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी जारी
सिम्स के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित नहीं होगी। अस्पताल में जूनियर डॉक्टर और पीजी डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि इंटर्न के नहीं रहने से जूनियर डॉक्टरों पर अतिरिक्त कार्यभार जरूर बढ़ेगा। इसे देखते हुए सभी विभागों को पहले से सतर्क कर दिया गया है ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े……
वहीं सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि इंटर्न डॉक्टरों की मांग की जानकारी उच्च स्तर पर भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि हड़ताल के बावजूद संस्थान और चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसलिए इमरजेंसी सेवाएं, कैजुअल्टी और ट्राइएज जैसी आवश्यक सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी, जबकि इंटर्न डॉक्टर ओपीडी और नियमित शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर कब तक कोई ठोस निर्णय लिया जाता है…





