गांवों में सूखे नल और सूखी उम्मीदें: बेलतरा में गहराया पेयजल संकट

बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में इन दिनों भीषण गर्मी के साथ-साथ पानी की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। हैंडपंप, बोरवेल और नल सूख चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था गांवों की जरूरतों के सामने बेहद नाकाफी साबित हो रही है। दर्जनों गांवों के लोग रोजाना पानी के लिए लंबी दूरी तय कर रहे हैं।
इस पेयजल संकट के बीच पंचायत सचिवों की हड़ताल ने परेशानी और बढ़ा दी है। पंचायत स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पा रही, जिससे जनप्रतिनिधि भी ग्रामीणों की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस नेता और जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष अंकित गौरहा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब गांवों में लोग पानी के लिए परेशान हैं, तब प्रशासन सुशासन तिहार मनाने में जुटा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रशासन का घेराव किया जाएगा।
गौरहा ने सरकार की ‘मोदी गारंटी’ योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं अब सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और इसका खामियाजा गांवों की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
सेमरा, भरारी, परसदा, सिंघरी, पौसरा, बैमा, नगोई, डगनिया, खैरा, पेंडरवा, बांका, कोरबी और सीस जैसे गांवों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां के लोग खुद अपने स्तर पर पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हैं।





