कोयला घोटाले के आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं और इनका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एनके व्यास ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के अपराधों में आरोपियों को राहत देना उचित नहीं है। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य मौजूद हैं।
एसीबी-ईओडब्ल्यू में दर्ज एफआईआर के अनुसार, नारायण साहू को कोयला सिंडिकेट का मुख्य कैश हैंडलर बताया गया है। जांच में सामने आया है कि उसने करीब 13 करोड़ रुपये की अवैध नकदी एकत्र की थी, जिसमें से लगभग 7.5 करोड़ रुपये अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाए गए थे।
आयकर विभाग की डायरियों में भी आरोपी से जुड़े लेनदेन की कई प्रविष्टियां मिली हैं, जो अवैध नेटवर्क में उसकी सक्रिय भूमिका की पुष्टि करती हैं।
नारायण साहू पिछले दो वर्षों से फरार है और उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अग्रिम जमानत की मांग की थी। उसके वकील ने दलील दी कि वह केवल ड्राइवर था और एफआईआर में उसका नाम नहीं है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि आरोपी ने जांच में कोई सहयोग नहीं किया और लगातार फरार बना हुआ है। सभी तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर क्षेत्रों में कोयला कारोबार से जुड़े ट्रांसपोर्टरों से प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। इस दौरान करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली गई।
इस मामले में कई आईएएस अधिकारियों, पूर्व मंत्रियों, विधायकों और व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सूर्यकांत तिवारी फिलहाल जेल में बंद है, जबकि उसका ड्राइवर नारायण साहू अब भी फरार है।
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जाता है, जिसने परमिट और परिवहन प्रक्रिया में अनियमितताओं के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई थी।





