छत्तीसगढ़ RI प्रमोशन परीक्षा रद्द, 216 पदोन्नतियां खत्म, हाईकोर्ट ने माना प्रक्रिया दूषित

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति के लिए आयोजित की गई परीक्षा को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने माना कि पूरी चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः निरस्त हो जाएगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि पदोन्नति परीक्षा में भाई-भतीजावाद, पक्षपात और नियमों की अनदेखी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को वैध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि वह पटवारी से RI पद पर पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित कर सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए।
पटवारी से RI प्रमोशन की लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें 2600 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे। 29 फरवरी 2024 को जारी परिणाम में 216 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया, लेकिन बाद में केवल 13 उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया गया। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिससे विवाद गहराता चला गया।
परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रमोशन से वंचित पटवारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कम अंक लाने वाले उम्मीदवारों को भी प्रमोशन दिया गया, जबकि अधिक अंक प्राप्त करने वाले योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया।
मामले की जांच के दौरान सामने आया कि एक अभ्यर्थी को पहले फेल घोषित किया गया, लेकिन बाद में उसे पास कर दिया गया। इसके अलावा पति-पत्नी, भाई-भाई और अन्य रिश्तेदारों को एक ही परीक्षा केंद्र में पास-पास बैठाया गया। कई अभ्यर्थियों के एक जैसे अंक आने पर भी सवाल खड़े हुए। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो चुके थे और चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
आरआई प्रमोशन घोटाले को लेकर एसीबी और ईओडब्ल्यू ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से दो अधिकारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है, जबकि अन्य की भूमिका की जांच जारी है। एजेंसियों के मुताबिक इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि पदोन्नति परीक्षा प्रणाली दूषित थी और चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। भविष्य में ऐसी किसी भी परीक्षा में निष्पक्षता और पवित्रता बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो।





