तुर्किये और अजरबैजान का बहिष्कार तेज, 30 प्रतिशत भारतीय पर्यटकों ने रद्द की बुकिंग

दिल्ली। भारत में तुर्किये और अजरबैजान के बहिष्कार का अभियान तेजी से जोर पकड़ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का समर्थन करने के चलते इन दोनों देशों के खिलाफ जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है।

इस बहिष्कार का असर पर्यटन, व्यापार और उड़ानों तक पर देखने को मिल रहा है। ईजमाईट्रिप के अनुसार, अजरबैजान की करीब 30% और तुर्किये की 22% बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। ट्रैवल कंपनियां इन देशों के लिए नई बुकिंग लेने से इनकार कर रही हैं। पर्यटक अब जॉर्जिया, सर्बिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं। दक्षिणी दिल्ली के रजिंदर सिंह ने अपनी 35 सदस्यीय टीम के साथ तुर्किये की यात्रा रद्द कर भारत में ही भ्रमण की योजना बनाई है।

हजारो यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द की

तुर्किये एयरलाइंस का किराया अन्य एयरलाइंस की तुलना में कम होने के बावजूद यात्री वैकल्पिक उड़ानों का चयन कर रहे हैं। लुधियाना, अमृतसर और जालंधर जैसे शहरों से तुर्किये जाने वाले हजारों यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है।

5 हजार करोड़ सालाना निर्यात पर रोक

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक बुलाकर तुर्किये और अजरबैजान के साथ व्यापार बंद करने पर निर्णय लेने की बात कही है। पंजाब के व्यापारियों ने तुर्किये को होने वाले 500 करोड़ रुपये के सालाना निर्यात को रोकने का ऐलान किया है। इन उत्पादों में दवाएं, ट्रैक्टर, टायर, स्टील, यार्न और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।

मुस्लिम संगठनों ने दिया समर्थन

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन ने भी बहिष्कार का समर्थन करते हुए सभी देशवासियों से एकजुटता की अपील की है। भारत तुर्किये को खनिज, मशीनरी, फार्मा उत्पाद, स्टील और कपास निर्यात करता है, जबकि तुर्किये से मार्बल, सोना और रसायन का आयात करता है। अजरबैजान से भारत कच्चा तेल मंगाता है, जबकि भारत वहां चाय, तंबाकू और रसायन निर्यात करता है।

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