तेल बाजार में बड़ा बदलाव: अमेरिका बनने की कगार पर शुद्ध निर्यातक

ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। मध्य पूर्व से तेल सप्लाई प्रभावित होने के कारण एशिया और यूरोप के देशों ने तेजी से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है, जिसका सीधा फायदा अमेरिका को मिल रहा है।

तेल की बढ़ती मांग के चलते अमेरिका से कच्चे तेल का निर्यात रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका का नेट इंपोर्ट यानी आयात और निर्यात के बीच का अंतर घटकर बेहद कम रह गया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि देश जल्द ही शुद्ध निर्यातक बन सकता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार ऐसा हो सकता है कि अमेरिका सालाना आधार पर कच्चे तेल का नेट एक्सपोर्टर बने। निर्यात बढ़कर लगभग 5.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जो पिछले कई महीनों में सबसे अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और सप्लाई में कमी के चलते एशिया और यूरोप के खरीदार अब दूर-दराज के स्रोतों से तेल खरीदने को मजबूर हैं। इससे अमेरिकी तेल की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।

हाल के समय में कई नए देश भी अमेरिका से तेल खरीदने लगे हैं। यूरोप और एशिया को बड़े पैमाने पर सप्लाई भेजी जा रही है, जिससे निर्यात का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अपनी अधिकतम निर्यात क्षमता के करीब पहुंच रहा है। पाइपलाइन और शिपिंग जैसी सीमाओं के कारण यह क्षमता लगभग 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक ही मानी जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि वैश्विक भू-राजनीतिक हालात तेल बाजार की दिशा तय कर रहे हैं और अमेरिका इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है।

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