छत्तीसगढ़ में बड़ा आत्मसमर्पण: जनताना सरकार के अध्यक्ष कमलू ने हथियार डाले, बीजापुर की तीन कमेटियां हुईं नेतृत्वहीन

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सक्रिय और वांछित माओवादी नेता कमलू ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। वह भैरमगढ़ एरिया कमेटी का इंचार्ज और वेस्ट बस्तर डिवीजन जनताना सरकार का अध्यक्ष रह चुका है। उसके सरेंडर के बाद बीजापुर की तीन मुख्य नक्सली कमेटियां अब नेतृत्वविहीन हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कमलू ने रविवार देर रात आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उसे जगदलपुर लाया गया है। यहां पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उसकी औपचारिक सरेंडर प्रक्रिया पूरी करेंगे। बताया जा रहा है कि कमलू पिछले कई महीनों से सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव में था। पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने उसका नेटवर्क कमजोर कर दिया था, जिससे उसने हथियार डालने का फैसला किया।
कमलू के आत्मसमर्पण के बाद बीजापुर जिले की तीनों मुख्य नक्सली एरिया कमेटियां — मद्देड, भैरमगढ़ और गंगालूर — अब बिना नेतृत्व के रह गई हैं। मद्देड कमेटी के इंचार्ज नागेश हाल ही में मुठभेड़ में मारा गया था, जबकि गंगालूर के इंचार्ज दिनेश ने भी कुछ समय पहले सरेंडर कर दिया था। अब केवल नेशनल पार्क एरिया कमेटी ही सक्रिय है, जिसका नेतृत्व नक्सली कमांडर दिलीप कर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कमलू के आत्मसमर्पण से नक्सल नेटवर्क के कई गुप्त मॉड्यूल उजागर होंगे। बीजापुर और आसपास के जंगलों में नक्सलियों की गतिविधियां पहले ही कमजोर पड़ने लगी हैं। पुलिस का मानना है कि अब माओवादियों के लिए बस्तर क्षेत्र में ठिकाना बनाना मुश्किल होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एंटी-नक्सल मिशन के तहत इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में बस्तर से नक्सल प्रभाव को पूरी तरह समाप्त किया जाए। पुलिस ने बताया कि आने वाले दिनों में बीजापुर और सुकमा में सर्च ऑपरेशन और तेज़ किए जाएंगे, ताकि शेष बचे नक्सली गुटों को भी आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जा सके।
कमलू के सरेंडर ने यह संकेत दे दिया है कि अब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की पकड़ ढीली पड़ रही है और सुरक्षा बल अपने अंतिम लक्ष्य के करीब पहुंच चुके हैं।





