छत्तीसगढ़ में वक्फ संपत्तियों को लेकर बड़ा खुलासा

रायपुर
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने जांच के दौरान पाया कि राज्य में करीब 500 करोड़ रुपये की वक्फ संपत्तियों पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराई गई है।
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने इस घोटाले का खुलासा किया है। इस खुलासे के साथ ही राज्यभर में वक्फ संपत्तियों पर हो रही जांच और विवादों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
राज्य वक्फ बोर्ड के अनुसार प्रदेश में करीब 5 हजार करोड़ रुपये की वक्फ संपत्तियां हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनका 85% हिस्सा अवैध कब्जे में है ।छत्तीसगढ़ में वक्फ बोर्ड के पास कुल 2006 संपत्तियां हैं।
ये संपत्तियां प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, मुंगेली, जगदलपुर, धमतरी और दुर्ग जैसे ज़िलों में फैली हुई हैं।
इनमें शामिल हैं: 371 मस्जिदें, 92 मदरसे, 142 ईदगाह
इनमें से कई संपत्तियां बेशकीमती हैं — जो आज करोड़ों की कीमत रखती हैं। लेकिन वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, इनका गलत तरीके से सौदा कर दिया गया है। और इसकी फर्जी रजिस्ट्री करा ली गयी है राज्य वक्फ बोर्ड अब इन अवैध कब्जों और सौदों की जांच में जुट गया है। सैकड़ों लोगों को नोटिस भेजे गए हैं।
इन फर्जी रजिस्ट्रियों में लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल्स, A2Z बेकरी, पगारिया ज्वेलर्स जैसे कई नामचीन प्रतिष्ठानों के नाम शामिल हैं।
यह सब कब सामने आया?
इस खुलासे की शुरुआत तब हुई जब नए वक्फ विधेयक 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को मंजूरी दी।
इसके बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में वक्फ संपत्तियों के सर्वे का आदेश दिया। जिसके बाद छत्तीसगढ़ में भी केंद्रीय एजेंसी की जांच के लिए पहुंची
कहाँ-कहाँ फैला है यह मामला?
वक्फ बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार रायपुर में 832 बिलासपुर में 1401 गरियाबंद में 943, राजनांदगांव में 300,और पूरे राज्य में वक्फ की 5 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है। इनमें से 85% पर अवैध कब्जा बताया जा रहा है।
क्यों उठ रहा है विवाद?
वक्फ बोर्ड का कहना है कि — मौलाना और काजी जैसे धार्मिक पदों पर बैठे लोगों ने खुद संपत्तियों का दुरुपयोग किया है। लगभग 5% संपत्ति बेच दी गई है, जो कि गैरकानूनी है।
वहीं रायपुर के शहर काजी मोहम्मद अली फारूकी ने नए वक्फ कानून को गैर-इस्लामी करार दिया है।उनका आरोप है कि यह कानून धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को सीमित करता है।
कौन हैं शामिल?
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया कि, 400 से अधिक अवैध कब्जेदारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। 14 नामजद प्रतिष्ठानों पर फर्जी रजिस्ट्री का आरोप है। जिनमे मकसूद खान, एवन बेकरी, और फैजल खान जैसे नाम सामने आए हैं, जिन पर मस्जिदों और धार्मिक स्थलों की जमीन कब्जाने का आरोप है।
वक्फ
अब आगे क्या?
डॉ. सलीम राज ने सभी जिलों के कलेक्टर्स को विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री शून्य करने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही जिलों के SP से सुरक्षा बल मुहैया कराने की मांग की गई है ताकि 21 दिन में इन संपत्तियों को खाली कराया जा सके।
इन सभी मामलों के बीच कई लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठ रहा होगा की आखिर ये वक्फ बोर्ड क्या है? जिसपे इतना विवाद हो रहा है, और इतनी राजनीती हो रही है तो आपको हम बता दे की
वक्फ का मतलब होता है — अल्लाह के नाम पर समर्पित संपत्ति, यह संपत्ति किसी व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि धार्मिक या चैरिटी उद्देश्यों के लिए होती है।
इनका संचालन वक्फ बोर्ड करता है और देखरेख मुतव्वली नामक व्यक्ति करता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि — रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद वक्फ बोर्ड भारत का तीसरा सबसे बड़ा भूमि स्वामी है। जो देश में नौ लाख चालीस हजार एकड़ में फैली 8.लाख 70 हजार की वक्फ संपत्तियाँ हैं, जिनकी अनुमानित कीमत एक अरब बीस लाख करोड़ से ज्यादा है।
तो छत्तीसगढ़ में वक्फ संपत्तियों पर हो रहा कब्जा, फर्जी रजिस्ट्रियां और अब नया कानून — ये सारे सवाल उठाते हैं
क्या धार्मिक संपत्तियों की हिफाजत वाकई हो पा रही है? और क्या नए कानून से मुसलमान समाज की वाजिब चिंता को नजरअंदाज किया जा रहा है या यह कानून पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम है?





