छत्तीसगढ़ के 6 बड़े घोटालों की कार्रवाई अधर में, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई 90 दिन की डेडलाइन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों से ईडी, ईओडब्ल्यू-एसीबी और सीबीआई कई करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटालों की जांच कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई भी जांच पूरी नहीं हो पाई है।
प्रमुख घोटालों में शराब घोटाला, कोल लेवी, डीएमएफ फंड दुरुपयोग, कस्टम मिलिंग, महादेव सट्टा एप, नान घोटाला, एनजीओ घोटाला, सीजीपीएससी और सीजीएमएससी में दवा व उपकरण खरीदी शामिल हैं। इन घोटालों से जुड़े करीब 50 आरोपित रायपुर जेल में बंद हैं, जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा और कई पूर्व व वर्तमान आईएएस अधिकारी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए ईडी और ईओडब्ल्यू-एसीबी को 90 दिनों में अंतिम आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इन घोटालों में इतनी रकम की हुई गड़बडी
सीजीएमएससी घोटाला: 411 करोड़ का घोटाला, 6 आरोपित रायपुर जेल में। जांच में मोक्षित कार्पोरेशन के शशांक चोपड़ा समेत अधिकारियों की संलिप्तता।
कोल लेवी घोटाला: 570 करोड़ का घोटाला, ईओडब्ल्यू ने 15 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव, निलंबित आईएएस और कारोबारी शामिल।
डीएमएफ घोटाला: 550 करोड़ का मामला, 10 से अधिक आरोपित, कई आईएएस और सप्लायर जांच के रडार पर।
महादेव सट्टा एप: 12 आरोपित जमानत पर, मुख्य फरार प्रमोटर और आईपीएस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री पर 508 करोड़ रिश्वत का आरोप।
एनजीओ घोटाला: 1,000 करोड़ से जुड़े दस्तावेज सीबीआई ने जब्त किए, कई सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व मंत्री जांच के दायरे में।
शराब घोटाला: 3,200 करोड़ का घोटाला, 14 आरोपित जेल में, 30 अन्य अग्रिम जमानत पर।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन मामलों में जांच एजेंसियों की धीमी कार्रवाई और लंबित रिपोर्ट से राज्य में भ्रष्टाचार की रोकथाम प्रभावित हो रही है। सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन के बाद आगामी 3 महीने में सभी जांच एजेंसियों को फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश करना अनिवार्य होगा।





