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मध्य प्रदेश की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: 42.74 लाख नाम हटे, महिलाओं की संख्या ज्यादा

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस ड्राफ्ट सूची के अनुसार राज्य की वोटर लिस्ट से कुल 42.74 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें करीब 19.19 लाख पुरुष और 23.64 लाख महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 8.40 लाख ऐसे नाम भी हैं, जिनकी सही तरह से मैपिंग नहीं हो पाई है, यानी जिनका रिकॉर्ड डिजिटल या भौतिक सत्यापन में साफ नहीं मिला।

ड्राफ्ट सूची जारी होते ही चुनाव आयोग की वेबसाइट पर तकनीकी समस्याएं भी सामने आईं। कई लोगों ने बताया कि EPIC नंबर डालने पर कैप्चा तो दिख रहा है, लेकिन सब्मिट करने के बाद वोटर की जानकारी नहीं खुल रही है और दोबारा कैप्चा भरने को कहा जा रहा है। वहीं मोबाइल नंबर डालने पर ही मतदाता की जानकारी खुल पा रही है। इससे आम लोगों को अपना नाम जांचने में परेशानी हो रही है।

आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि नाम हटने के पीछे मृत्यु, स्थान परिवर्तन, डुप्लीकेट एंट्री, लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता और दस्तावेजों में गड़बड़ी जैसे कारण हैं। आयोग ने साफ किया है कि यह सिर्फ ड्राफ्ट सूची है और अंतिम सूची जारी होने से पहले दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया होगी।

चुनाव आयोग ने यह भी जानकारी दी है कि आज केरल, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी जारी की जाएगी। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में नाम हटने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस प्रक्रिया को काफी अहम माना जा रहा है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जा चुकी है। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मिलाकर 2 करोड़ 70 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा नाम तमिलनाडु से 97 लाख, गुजरात से 73 लाख और पश्चिम बंगाल से 58 लाख हटाए गए हैं।

केरल में भी करीब 25 लाख नाम हटने की संभावना जताई जा रही है। वहां 2.86 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत मतदाता हैं और SIR के तहत 99 प्रतिशत से अधिक डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। केरल विधानसभा के चुनाव 2026 में होने हैं, ऐसे में मतदाता सूची का शुद्धिकरण बेहद जरूरी माना जा रहा है।

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा। ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट, साथ ही दावा-आपत्ति की जानकारी आयोग की वेबसाइट पर डाली जाएगी और सभी राजनीतिक दलों को भी दी जाएगी। अगर कोई मतदाता फैसले से असंतुष्ट होता है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकता है।

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मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका मकसद सिर्फ सही और योग्य मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है।

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