डिफेंस सेक्टर में रिकॉर्ड ऑर्डर से शेयर बाजार में हलचल, इन कंपनियों पर निवेशकों की नजर

भारत का रक्षा क्षेत्र इस समय तेज बदलाव और विस्तार के दौर से गुजर रहा है। सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। वित्त वर्ष 2025 में देश का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे डिफेंस कंपनियों की ऑर्डर बुक और शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है।
जानकारों के मुताबिक आने वाले समय में रक्षा मंत्रालय के बजट में भी बढ़ोतरी की तैयारी है। वित्त वर्ष 2027 के लिए करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त बजट की मांग की जा सकती है। बीते एक दशक में रक्षा उत्पादन में 174 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा फायदा इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को मिला है।
इस तेजी के बीच कुछ डिफेंस कंपनियां निवेशकों के लिए खास चर्चा में हैं, जिनकी ऑर्डर बुक 15,000 करोड़ से लेकर 25,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की हो चुकी है। इनमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स भारतीय नौसेना के लिए सबमरीन और युद्धपोत बनाने वाली प्रमुख नवरत्न कंपनी है। सितंबर 2025 तक इसके पास करीब 27,415 करोड़ रुपये के ऑर्डर मौजूद हैं। हालिया तिमाही में मुनाफे में हल्की गिरावट जरूर आई है, लेकिन कंपनी कर्जमुक्त है, जिसे निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।
कोचीन शिपयार्ड बड़े और अत्याधुनिक जहाजों के निर्माण में सक्षम है। इसके ऑर्डर बुक का आकार लगभग 21,100 करोड़ रुपये है, जिसमें बड़ा हिस्सा रक्षा परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है। मुनाफे और मार्जिन में गिरावट के बावजूद बड़े प्रोजेक्ट्स इसे लंबी अवधि में मजबूत स्थिति में रखते हैं।
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स भी बाजार की नजर में है। नौसेना के लिए फ्रिगेट और सर्वे वेसल बनाने वाली इस मिनीरत्न कंपनी के पास लगभग 20,200 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। कंपनी को नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में भी देखा जा रहा है।
सोलर इंडस्ट्रीज ने इंडस्ट्रियल विस्फोटकों से आगे बढ़कर डिफेंस सेक्टर में मजबूत पकड़ बना ली है। पिनाका रॉकेट सिस्टम जैसे उत्पादों के चलते इसका डिफेंस ऑर्डर बुक 15,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। कंपनी की बिक्री और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
बीईएमएल भी डिफेंस सेक्टर की एक अहम कंपनी है, जो आर्मर्ड व्हीकल्स के साथ रेलवे और माइनिंग के क्षेत्र में भी काम करती है। इसका ऑर्डर बुक 16,342 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
डिफेंस सेक्टर में बढ़ते ऑर्डर्स और सरकार के समर्थन ने इन कंपनियों को निवेशकों की सूची में ऊपर ला दिया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निवेश से पहले जोखिम और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।





