बस्तर में खुला ‘पंडुम कैफे’: सरेंडर नक्सलियों और पीड़ित परिवारों को मिला सम्मान और रोजगार

छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक अनोखी पहल की शुरुआत हुई है, जहां सरेंडर किए गए नक्सली और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवार मिलकर ‘पंडुम कैफे’ का संचालन करेंगे। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तैयार किए गए इस कैफे का उद्देश्य इन परिवारों को सुरक्षित आजीविका देना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। कैफे की शुरुआत में कुल 13 लोगों को रोजगार दिया गया है, जिनमें 8 नक्सल हिंसा पीड़ित और 5 सरेंडर नक्सली शामिल हैं। इनमें 8 महिलाएं भी हैं।

कैफे का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। उद्घाटन के दौरान उन्होंने खुद कैफे से खाना ऑर्डर किया और सरेंडर नक्सलियों द्वारा परोसे गए भोजन का स्वाद चखा। इसके बाद उन्होंने डिजिटल पेमेंट कर कैफे संचालकों का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने इस कदम को बस्तर में शांति और विकास के नए अध्याय की शुरुआत बताया।

जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में बने इस कैफे की संरचना के लिए प्रशासन ने आर्थिक मदद की है। पुनर्वास नीति के तहत नक्सल प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। कैफे का संचालन संभाल रहे सभी 13 लोगों को पहले एक महीने से अधिक समय तक ट्रेनिंग दी गई। इसमें उन्हें खाना बनाने, सर्व करने, स्वच्छता बनाए रखने, ग्राहक व्यवहार और ऑर्डर प्रोसेस जैसे कौशल सिखाए गए, ताकि वे पेशेवर तरीके से कैफे चला सकें।

बस्तर के IG सुंदरराज पी ने बताया कि कैफे के लिए चयनित सभी लोगों को हॉस्पिटैलिटी, ग्राहक सेवा, उद्यमिता और खाद्य सुरक्षा मानकों की अच्छी ट्रेनिंग दी गई है, जो उनके भविष्य के करियर को मजबूत बनाएगी। उन्होंने कहा कि ‘पंडुम’ नाम बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से प्रेरित है और इसका टैगलाइन ‘Where every cup tells a story’ इन लोगों की संघर्ष से आशा तक की यात्रा को दर्शाता है।

सरकार का मानना है कि यह मॉडल नक्सल हिंसा से प्रभावित अन्य क्षेत्रों के लिए भी मिसाल बन सकता है। पंडुम कैफे सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि बस्तर में भरोसा, बदलाव और पुनर्वास की कहानी है, जो अब हर कप कॉफी के साथ नई उम्मीद भी परोस रहा है।

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