इंद्रावती नेशनल पार्क मुठभेड़ से मिले डिजिटल सबूतों ने खोला माओवादियों के अर्बन नेटवर्क का रास्ता, पुलिस जांच तेज

इंद्रावती नेशनल पार्क में हुई बड़ी मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने माओवादियों के अर्बन नेटवर्क की तह तक जाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस मुठभेड़ में मद्देड़ एरिया कमेटी प्रभारी कन्ना ऊर्फ बुचन्ना और पामेड़ एरिया कमेटी सचिव उर्मिला सहित छह माओवादी मारे गए थे। यह सभी करीब 27 लाख रुपये के इनामी थे। घटनास्थल से बरामद डिजिटल डिवाइसों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच के शुरुआती विश्लेषण में शहरी सपोर्ट चैनल, फंडिंग नेटवर्क, संगठनात्मक संवाद और प्रचार तंत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के संकेत मिले हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मद्देड़ और पामेड़ एरिया कमेटियां महाराष्ट्र–तेलंगाना–छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय थीं। इनका मुख्य काम माओवादी समूहों के बीच समन्वय स्थापित करना, सीमा पार आवाजाही को सुचारु रखना और जंगल में चलने वाली लॉजिस्टिक सप्लाई को मजबूत बनाए रखना था। इसी वजह से दोनों कमेटियों की शहरी मॉड्यूल से सीधी लिंक मानी जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि बरामद डेटा से अर्बन नेटवर्क के कई प्रमुख नोड्स — जैसे फंडिंग पार्टनर, लॉजिस्टिक सप्लायर और संदेशवाहकों तक पहुंच आसान हो सकती है। एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे फॉरेंसिक विश्लेषण आगे बढ़ेगा, शहरी इकाइयों की भूमिका और स्पष्ट होगी और लक्षित कार्रवाई की तैयारी की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक बुचन्ना और उर्मिला के मारे जाने से बस्तर के पश्चिम और दक्षिण डिवीजनों की रणनीतिक और रसद संरचना पर बड़ा असर पड़ा है।
कन्ना ऊर्फ बुचन्ना माओवादी वारदातों का कुख्यात मास्टरमाइंड माना जाता था। उसके खिलाफ 42 आपराधिक मामले और 18 स्थायी वारंट दर्ज थे। पिछले एक दशक में उसने पुलिस ठिकानों, विकास कार्यों और ग्रामीणों पर कई हमलों की योजनाएं बनाईं। मुखबिरी के संदेह में 20 से अधिक ग्रामीणों की हत्या, छह IED ब्लास्ट, बसों व वाहनों को जलाने और ठेकेदारों से लेवी वसूली जैसी घटनाएं उसके नेतृत्व में हुईं।
अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ में मिले दस्तावेज और डिवाइस अर्बन नेटवर्क को उजागर करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं और जल्द ही नेटवर्क के कई हिस्सों पर कार्रवाई संभव है।





