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पैसे के लिए देश की सुरक्षा दांव पर, अमेरिका ने चीन को बना दिया ‘टेक सुपरपावर’

अमेरिका की कथनी और करनी के बीच गहरा फर्क उजागर हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी करते हुए अपनी ही टेक कंपनियों को चीन में जासूसी तकनीक बेचने की अनुमति दी है। यह खुलासा एसोसिएटेड प्रेस (AP) की जांच में हुआ है, जिसमें सामने आया कि बीते दो दशकों से पांच अलग-अलग प्रशासनों ने अमेरिकी कंपनियों को चीन की पुलिस, सरकारी एजेंसियों और निगरानी संस्थानों को तकनीक बेचने में मदद की।

रिपोर्ट बताती है कि चीन इस तकनीक का इस्तेमाल सेना और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने में कर रहा है। अमेरिका ने चीन को हाई-टेक चिप्स बेचने पर रोक तो लगाई, लेकिन ‘क्लाउड सर्विस’ के loophole का फायदा उठाकर चीन अमेरिकी कंपनियों से इन्हीं चिप्स को किराए पर ले रहा है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी कंपनियों के ज़रिए चीन अपने AI मॉडल को ट्रेन कर रहा है। इस loophole को बंद करने की कोशिश चार बार हो चुकी है, लेकिन हर बार टेक लॉबी के दबाव में ये प्रयास विफल हो गए।

पिछले वर्षों में अमेरिकी टेक कंपनियों ने चीन से जुड़े बिलों पर असर डालने के लिए करोड़ों डॉलर लॉबिस्टों पर खर्च किए हैं। कंपनियों का तर्क है कि अगर व्यापार रोका गया, तो चीन अपनी तकनीक खुद विकसित कर लेगा, जिससे अमेरिका को और नुकसान होगा।

इस बीच राष्ट्रपति ट्रम्प ने एनवीडिया और एएमडी जैसी कंपनियों के साथ समझौते किए हैं, जिनसे चीन को उन्नत चिप्स की बिक्री पर लगी पाबंदियों में ढील दी गई। इसके बदले अमेरिकी सरकार को राजस्व में 15% की हिस्सेदारी मिलेगी। वहीं, सरकार ने इंटेल में भी 10% हिस्सेदारी ली है, जिससे अमेरिकी करदाताओं का पैसा अब चीन को तकनीक बेचने से होने वाले मुनाफे से जुड़ गया है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों की निगरानी और अत्याचारों में भी हो रहा है। कई पीड़ितों ने बताया कि अमेरिकी सिस्टम से उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी, यहां तक कि टॉयलेट में भी कैमरे लगाए गए थे।

इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी प्रशासन मुनाफे के लिए सुरक्षा और मानवाधिकारों के सिद्धांतों को ताक पर रख चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अमेरिका की “रणनीतिक विफलता” है, जिसने खुद अपने प्रतिद्वंद्वी चीन को तकनीकी रूप से ‘सुपरपावर’ बनने का रास्ता दिखा दिया है।

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