आदिवासी विभाग में अनियमितता का खुलासा, 92 लाख की निविदा निरस्त… जांच टीम गठित

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी से एक बड़ी खबर सामने आई है। द्वारा छात्रावासों और आश्रमों की मरम्मत के लिए जारी लगभग ₹92 लाख की निविदा को नियमों के उल्लंघन के चलते निरस्त कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी अनियमितताएं मिली हैं और मजदूरों के इंश्योरेंस से जुड़ी जरूरी अमानत राशि तक जमा नहीं की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, यह टेंडर 4 अगस्त 2025 को जारी हुआ था। लेकिन जांच में सामने आया कि निविदा प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां की गईं। सूत्रों का कहना है कि मामला केवल तकनीकी गलती का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार से भी जुड़ा हो सकता है। आरोप है कि विभाग में पदस्थ एक लिपिक ने निविदा प्रक्रिया में अपने रिश्तेदारों को ठेका दिलाने की कोशिश की थी।
इन गंभीर आरोपों के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। सहायक आयुक्त पी.सी. लहरे ने सफाई देते हुए कहा कि ये अनियमितताएं उनके पदभार ग्रहण करने से पहले की हैं। उन्होंने बताया कि पुराने कार्यों और निविदाओं से जुड़ी शिकायतों की विभागीय जांच पहले ही शुरू की जा चुकी है।
जिला प्रशासन अब इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच टीम गठित करने जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद नई निविदा प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी ताकि छात्रावासों और आश्रमों के मरम्मत कार्य समय पर पूरे किए जा सकें।
बिलासपुर में आदिवासी छात्रों के हित के लिए जारी यह राशि अगर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती, तो इसका सीधा असर उन बच्चों पर पड़ता जो सरकारी छात्रावासों में रहते हैं। फिलहाल विभाग की कार्रवाई ने अनियमितताओं पर रोक लगाई है, लेकिन अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है — क्या ये सिर्फ लापरवाही थी या फिर कोई बड़ा खेल? इसका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा।





