चमोली का नंदानगर जोशीमठ की राह पर, 34 परिवार बेघर – बाजार भी खाली

दिल्ली। उत्तराखंड का चमोली जिला अब नए खतरे की जद में है। जोशीमठ के बाद नंदानगर घाट में भी भू-धंसाव ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। लगातार बारिश और भूस्खलन से शुक्रवार देर रात हालात अचानक बिगड़ गए, जिसके चलते आठ मकान ढह गए। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर 34 परिवारों को घरों से बाहर निकालकर रिलीफ कैंप में शिफ्ट किया है। साथ ही बाजार की करीब 40 दुकानें भी खाली करा दी गई हैं।

DDRF की टीमों ने इन घरों में रहने वाले 64 लोगों को रिलीफ कैंप में पहुंचाया।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी की कमाई से बनाए गए घर और दुकानें अब बर्बादी की कगार पर हैं। नंदानगर के लक्ष्मी मार्केट और बैंड बाजार क्षेत्र में कई मकानों में गहरी दरारें देखी गईं, जबकि पंचायत के कुंतारी गांव में जमीन धंसने से 16 घर खतरे में हैं। DDRF की टीमों ने यहां 64 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

नंदानगर व्यापार मंडल अध्यक्ष नंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि बाजार के ऊपर एक विशाल चट्टान खिसक रही है। अगर यह टूटी तो 150 से ज्यादा दुकानें मलबे में तब्दील हो सकती हैं। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

भूस्खलन को रोकने के लिए बारिश के पानी को सुरक्षित रूप से एक नाले में छोड़ा जा रहा है।

यह संकट जोशीमठ की याद दिलाता है। जनवरी 2023 में जोशीमठ में भू-धंसाव से 800 से अधिक घरों में दरारें आई थीं और 181 इमारतें खाली कराई गई थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र की मिट्टी कमजोर है क्योंकि यह पहाड़ों से आए मलबे (मोरेन) पर बसा है।

GSI की रिपोर्ट ने भी बताया था कि खराब ड्रेनेज सिस्टम, भारी निर्माण और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स जमीन को कमजोर बना रहे हैं। नंदानगर की मौजूदा स्थिति एक बार फिर चेतावनी देती है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पूरा इलाका जोशीमठ की तरह जमींदोज हो सकता है।

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