आदिवासी जमीन पर कब्जे में छत्तीसगढ़ देश में सबसे आगे: संसद रिपोर्ट

रायपुर। संसद में प्रस्तुत एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश में आदिवासी जमीन पर सबसे अधिक कब्जे और भूमि अधिकार दावों का केंद्र बन गया है। राज्य में अब तक 9 लाख 47 हजार से अधिक लोगों और संगठनों ने भूमि अधिकार का दावा किया है, जो देश में सबसे ज्यादा है।
बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लीज के नाम पर व्यापारी आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। इन्हें मामूली मुआवजा देकर स्थायी निर्माण कर जमीन को कब्जे में ले लिया जाता है, और बाद में फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत पट्टा पाने के लिए दावे किए जाते हैं। हालांकि जांच के बाद बड़ी संख्या में दावे खारिज भी हुए हैं।
प्रदेश में अब तक 9 लाख दावों में से 4 लाख से अधिक दावे रद्द किए जा चुके हैं, जिनमें 3,658 संगठनों के दावे भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में 31 मई 2025 तक 36.3% भूमि अधिकार दावे खारिज हुए, जबकि छत्तीसगढ़ में यह संख्या सबसे अधिक है।
बस्तर-सर्गुजा में गैर-आदिवासी लोग आदिवासियों के नाम पर जमीन लेने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि कानून के मुताबिक गैर-आदिवासी व्यक्ति को आदिवासी जमीन खरीदने के लिए कलेक्टर की अनुमति आवश्यक होती है, जिसके अभाव में कई दावे रद्द हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बाद ओडिशा और मध्यप्रदेश भूमि अधिकार दावों के मामले में दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।





