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Supreme Court reprimands ED : सुप्रीम कोर्ट ने ED को लगाई फटकार

Supreme Court reprimands ED : सुप्रीमकोर्ट ने लगाई ED को फटकार कहा राजनीतिक लड़ाइयां चुनाव में लड़ी जानी चाहिए, जांच एजेंसियों के जरिए नहीं,

नई दिल्ली : “राजनीतिक लड़ाई का मैदान चुनाव होना चाहिए, जांच एजेंसियां नहीं” — सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी ने देश की मौजूदा सियासी बहस को नई हवा दे दी है। (Supreme Court reprimands ED) प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती छापेमारी और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। ED यानी प्रवर्तन निदेशालय लगातार कई राजनीतिक दलों के नेताओं के घर छापेमारी कार्रवाई कर रही है। और कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विपक्षी दल पार्टियों को निशाना बनाया जा रहा है। इसे लेकर विपक्षी दलों ने कई बार कहा कि बीजेपी हमें निशाना बना रही है। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने भी ED की इस तरह की कार्यप्रणाली को देखते हुए फटकार लगाई है।

अगर हम ED के छापेमारी की बात करें तो। हाल ही में छत्तीसगढ़ में ED ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल के घर छापेमार कार्रवाई की जिसमें उनके बेटे चैतन्य बघेल को जेल भेज दिया गया। अब उनसे पूछताछ चल रही है और इन्हीं सबके बीच छत्तीसगढ़ के सियासत में बवाल मचा हुआ है। इस मामले में भूपेश बघेल का कहना था कि विधानसभा सत्र के आखिरी दिन कल अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी इसलिए भाजपा द्वारा यह कदम उठाया गया।

इसके पहले भी ED ने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खच्चरिया वास के करीब 19 ठिकानों पर छापेमारी की। उन्होंने भी कहा था कि बीजेपी सरकार हमें परेशान करने के लिए यह कार्रवाई करवा रही है। इसके अलावा भी और ऐसे कई मामले हैं जिसमें ED ने करवाई की और लोगों ने कहा कि ED बीजेपी के इशारों पर नाचती हैं।(Supreme Court reprimands ED)

अब इस बात पर कितनी सच्चाई है कितनी नहीं यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने ED को फटकार लगाते हुए कहा कि राजनीतिक लड़ाइयां चुनाव में लड़ी जानी चाहिए जाट एजेंसी के जरिए नहीं। ये टिप्पणी CJI बीआर गवई और जस्टिस के.विनोद चंद्रन की बेंच ने मैसूर अर्बन डेवलपमेंट बोर्ड (MUDA) केस में ED की अपील की सुनवाई के दौरान की।

आप को बता दे मैसूर अर्बन डेवलपमेंट बोर्ड साल 1992 में अर्बन डेवलपमेंट संस्थान मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) ने रिहायशी इलाके विकसित करने के लिए किसानों से जमीन ली थी। इसके बदले MUDA की इंसेंटिव 50:50 स्कीम के तहत जमीन मालिकों को विकसित भूमि में 50% साइट या एक वैकल्पिक साइट दी गई। दरअसल, ED ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को MUDA केस में समन भेजा था। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मार्च में यह समन रद्द कर दिया था। ED ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में ED की अपील खारिज कर दी।(Supreme Court reprimands ED)

अब सवाल यह उठता है की क्या विपक्षी दल जो कहा रहा है वही सही, क्या ED सच में बीजेपी की कटपुतली है या सच कुछ और ही है। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद प्रवर्तन निदेशालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और राजनीति में जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है, तो विपक्ष के आरोपों को अब केवल राजनीतिक बयानबाज़ी कहकर टाला नहीं जा सकता। आने वाले वक्त में देखना होगा कि क्या ED अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाती है, या फिर इस बहस को और गहराने का मौका देती है।(Supreme Court reprimands ED)

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