शराब घोटाला: अफसरों को सिंडिकेट से मिले 88 करोड़ से ज्यादा, पैसों को संपत्ति-कारोबार में किया इवेस्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। घोटाले में शामिल आबकारी विभाग के अफसरों ने मिलकर 88 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की, जिसे उन्होंने संपत्तियों की खरीद और व्यवसायों में निवेश किया। EOW ने अपनी चार्जशीट में इस सिंडिकेट की पूरी व्यवस्था और धन के प्रवाह का ब्योरा प्रस्तुत किया है।
EOW की जांच के अनुसार, कम से कम 11 आबकारी अफसरों की संपत्तियों का विवरण सामने आया है, जिनमें से कई ने प्रॉपर्टी, जमीन, फ्लैट, और निवेश के जरिए घोटाले से प्राप्त रकम को ठिकाने लगाया। इस घोटाले में अधिकारियों को शराब पेटी पर 140 रुपये की कमीशन दर से पैसा मिलता था। नोहर सिंह ठाकुर को सबसे अधिक 11.06 करोड़ रुपये, नीतू नोतानी को 7.78 करोड़, नवीन प्रताप सिंह तोमर को 6.70 करोड़, और अरविंद पटले को 7.44 करोड़ की कमाई हुई।
इन पैसों से अफसरों ने जमकर संपत्ति खरीदी। नवीन प्रताप सिंह तोमर ने 39 संपत्तियां, मंजूश्री कसेर ने 25 संपत्तियां, और प्रमोद नेताम ने 6 संपत्तियां विभिन्न नामों से खरीदीं। वहीं दिनकर वासनिक ने अपने धन को कारोबार में इन्वेस्ट किया। EOW ने इस घोटाले से जुड़े मामलों में अब तक 200 लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें शराब कारोबारी, विभागीय अफसर, एजेंट और हवाला कारोबारी शामिल हैं।
कई संपत्तियां फर्जी नामों से खरीदी गईं, ताकि जांच से बचा जा सके। मंजूश्री कसेर ने रायपुर, जांजगीर, और गरियाबंद में संपत्तियां सुरेश कुमार, सुनील पटेल, माला सिंह जैसे नामों से खरीदीं। प्रमोद नेताम ने कोरबा और कोरिया में संपत्तियां अपने परिवार के नाम से खरीदीं। EOW की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इस घोटाले का मुख्य उद्देश्य शराब के सरकारी व्यापार में कमीशन की रकम को हेराफेरी करके अफसरों के निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करना था। अब इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।





