बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गोद लेने वाली महिला कर्मचारी को भी मिलेगी मातृत्व अवकाश की सुविधा

बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बच्चे को गोद लेने वाली महिला कर्मचारी को भी चाइल्ड केयर, गोद लेने की छुट्टी या मातृत्व अवकाश का पूरा अधिकार मिलता है। कोर्ट ने यह साफ किया कि चाहे कोई महिला जैविक मां हो या दत्तक माँ, दोनों को मातृत्व अवकाश में कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने बताया कि मातृत्व अवकाश सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं का एक मूलभूत अधिकार है, जिससे वे अपने बच्चे की सही देखभाल और प्यार कर सकें। जस्टिस विभु दत्ता गुरु की बेंच ने यह भी कहा कि यह अधिकार संविधान के तहत मां को उसके परिवार की देखभाल करने में मदद करता है।

मामले में याचिकाकर्ता, जो आईआईएम रायपुर में सहायक प्रशासनिक अधिकारी हैं, ने 20 नवंबर 2023 को दो दिन की बच्ची को गोद लिया था और 180 दिनों की छुट्टी मांगी थी। लेकिन संस्थान ने अपनी HR नीति के आधार पर छुट्टी देने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को 1972 के नियमों के तहत 180 दिन की गोद लेने की छुट्टी मिलनी चाहिए। चूंकि उन्हें पहले से 84 दिन की मातृत्व छुट्टी मिल चुकी है, इसलिए बाकी का अवकाश भी दिया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि मां बनना महिलाओं के जीवन की सबसे प्राकृतिक घटना है, इसलिए नियोक्ताओं को कामकाजी महिलाओं के प्रति सहानुभूति और समझदारी दिखानी चाहिए। गोद लेने वाली माताओं का भी उतना ही अधिकार है जितना जैविक माताओं का।

साथ ही कोर्ट ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की नौकरी में भागीदारी कोई खास सुविधा नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है।

 

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