वेतन संकट जारी, लेकिन टैक्स वसूली बनी राहत की किरण

रायपुर। नगर निगम की आर्थिक हालत इस साल थोड़ी संभली जरूर है, लेकिन वेतन संकट अब भी बना हुआ है। निगम ने इस साल रिकॉर्ड 100 करोड़ रुपये की टैक्स और राजस्व वसूली की है, जिससे जरूरी खर्च जैसे बिजली बिल, ईंधन और मरम्मत में थोड़ी राहत मिली है। लेकिन कर्मचारियों खासकर प्लेसमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को अब भी समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है।

निगम को आमतौर पर जमीन की रजिस्ट्री से एक प्रतिशत मुद्रांक शुल्क और संधारण मद से राशि मिलती है, जिसका इस्तेमाल कर्मचारियों के वेतन में होता है। लेकिन पिछले दो साल से करीब 25 करोड़ रुपये की यह रकम राज्य सरकार से नहीं मिली है। इस कारण निगम को कर्मचारियों को समय पर वेतन देना मुश्किल हो रहा है।

निगम का मासिक खर्च करीब 5 करोड़ रुपये है, जिसमें से सवा दो करोड़ रुपये केवल वेतन पर खर्च होते हैं। जबकि निगम की सालाना आमदनी सिर्फ 40 करोड़ रुपये के आसपास है और खर्च 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने बताया कि इस बार टैक्स वसूली में रिकॉर्ड सफलता मिली है और लगभग 150 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा गया है। आयुक्त अमित कुमार के निर्देश पर 173 बड़े बकायादारों को नोटिस भेजे गए, जिससे बड़ी राशि जमा हो सकी।

फिलहाल निगम ने टैक्स वसूली का काम खुद अपने हाथ में लिया है, क्योंकि पहले यह काम एक निजी कंपनी करती थी, जिसका अनुबंध अब खत्म कर दिया गया है।

टैक्स वसूली में तो रिकॉर्ड बना, लेकिन कर्मचारियों के वेतन का संकट अभी भी टला नहीं है।

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