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आखिर क्यों बस्तर में 107 साल तक नहीं हुई किसी राजा की शादी

रायपुर : 20 फरवरी 2025.. ये वो दिन था जब राजा कमलचंद भंजदेव की बारात निकाली गई… हाथी पर सवार लगभग 100 से ज्यादा शाही बारातियों के साथ राजा कमलचंद भंजदेव की बारात निकाली गई.. इस दौरान पुरे जगदलपुर की जनता इस शाही बारात को देखने के लिए सड़कों पर उतरी…इस शाही शादी में खास बात ये रही कि ये कोइ आम शादी नहीं.. बल्कि इतिहास में दर्ज होने वाली शादी है… क्योंकि 107 साल बाद यहां किसी राजा की बारात निकली है…

मां दंतेश्वरी हुई शादी में शामिल

इस शादी में एक और खास चीज ये रही कि इस शादी से पहले देवी मां दंतेश्वरी से अनुमति ली गई.. और मां दंतेश्वरी खुद इस शादी में शामिल हुई… मां दंतेश्वरी की छत्र और छड़ी बारात के साथ नागौद ले जाई गई.. जो शायद पहली बार किसी शादी में शामिल हुई है… इसके अलावा ये छत्र और छड़ी, केवल बस्तर दशहरा और फाल्गुन मड़ई के दौरान निकाली जाती है..

आदीवासी परंपराओं से की गई शादी

वहीं, इस शादी में एक और खास बात ये रही कि बस्तर महाराज ने आदीवासी परंपराओं को निभाते हुए.. नागौद रियासत की राजकुमारी, कुमारी भुवनेश्वरी के साथ विवाह किया…उनकी शादी में आदीवासी परंपराओं की खास झलक देखने को मिली…इस शादी में 5 सुवासिनों की अहम भुमिका रही… क्योंकि बस्तर की परंपराओं में सबसे सुवासिनें ही सभी रस्में निभाती है.. वहीं अगर आपलोगों को यदि सुवासिन का मतलब नहीं पता…तो मैं बता दुं कि छत्तीसगढ़ की शादी परंपराओं में सुवासिन दुल्हे और दुल्हन की बुआ और बड़ी बहन बनती हैं.. जो शादी की रस्मों में महत्वपुर्ण भुमिका निभाती है…

बस्तर के आदिवासी लेकर आए राजा के लिए हल्दी

इसके अलावा बस्तर परंपराओं के अनुसार, शादी में हल्दी रस्म का खास महत्व होता है… जिसके कारण बस्तर के अलग- अलग क्षेत्रों के आदिवासी, राजा के लिए हल्दी लेकर आए थे…  वहीं हल्दी और अन्य परंपराओं के बाद जब राजा की बारात निकाली गई… तो बेहद शाही अंदाज में हाथी पर राजा को नगर भ्रमण कराया गया… जिसे देखने पुरा जगुलपुर सड़कों पर उतर आया….

आदीवासी धुन ने बढ़ाई शादी की शोभा

वहीं इस शादी में.. जो सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहे.. वो थे बस्तर की आदीवासी और उनकी लोक संस्कृति….इस खास अवसर पर बस्तर की जनता… अपने राजा के लिए अपने हाथों से फुलों की माला गुंथ कर लाई थी.. और इस शादी डीजे या धुमाल जैसे बैंड्स ने नहीं… बल्कि पारंपरिक वाद्य यंत्र, जिसने पारंपरिक आदीवासी धुन से इस शादी की शोभा बढ़ाई…

आखिरी बार हुई थी राजा रुद्रप्रताप देव की शादी

अब बात करें 107 साल बाद होने वाली की शादी की.. तो कि करीब पांच पीढ़ियों के बाद, यहां राजमहल में किसी गद्दी पर आसीन राजा की शादी हो रही है.. इससे पहले साल 1918 में राजा रुद्र प्रताप देव का दूसरा विवाह यहां हुआ था। रुद्रप्रताप देव की पहली शादी 1908 में कुसुमलता से हुई थी जिनकी मृत्यु के बाद बस्तर महाराज ने चंद्रादेवी से दूसरा विवाह किया और शादी के महज 2 साल बाद 1921 में रुद्र प्रताप देव की भी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद राज परिवार के किसी भी सदस्य का विवाह राजमहल में नहीं हुआ… सभी ने शादियां तो की.. लेकिन अलग-अलग प्रदेशों में…

राजा चाहते थे बस्तर की जनता हो शादी में शामिल

वहीं बस्तर महाराज कमलचंद भंजदेव.. जो काकतीय राजवंश के 23वें राजा माने जाते हैं… वो बस्तर की जनता के लिए न केवल शासक, बल्कि एक पिता और आराध्य के सामान है.. यही वजह है कि बस्तर महाराज, बस्तर की आदीवासी जनता के साथ अपनी शादी में शामिल होना चाहते थे.. और इसी के चलते उन्होने बस्तर महल में आदीवासी परंपराओं के साथ शादी करना चुना….  और इस शादी में देश-भर से राज परिवार शामिल हुआ…

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