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Collectorate siege: प्रत्याशी और ग्रामीणों ने निर्वाचन आयोग पर सरपंच चुनाव में गड़बड़ी करने का लगाया आरोप, कलेक्टोरेट परिसर का किया घेराव

Collectorate siege (बिलासपुर) : मस्तूरी के ग्राम जेवरा नवापारा चश्मा छाप में हुए सरपंच चुनाव में धांधली के आरोप लगाते हुए प्रत्याशी भागवत सिंह खुसरो और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। उनका कहना है कि मतगणना में अनियमितताएं बरती गईं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। भागवत सिंह खुसरो ने बताया कि पहली मतगणना में कोई गड़बड़ी नहीं थी, लेकिन दूसरी बार काउंटिंग में गड़बड़ी नजर आई।

जब उन्होंने तीसरी बार पुनः गिनती करवाई, तो उन्हें बढ़त मिल गई। इसके बाद चौथी बार मतगणना की मांग की गई, लेकिन मतगणना केंद्र में मौजूद पीठासीन अधिकारियों ने इनकार कर दिया।सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि बैलेट पेपर में प्रत्याशी भागवत सिंह खुसरो का नाम गलत दर्ज किया गया। उनके वास्तविक नाम की जगह “भागवत लहरे” लिखा गया, जिससे मतदाता भ्रमित हो गए। यह निर्वाचन आयोग की बड़ी प्रशासनिक चूक है, जिसने चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब भागवत सिंह खुसरो और उनके समर्थक शिकायत लेकर मतगणना स्थल पर पहुंचे, तो थानेदार ने दलबल के साथ सभी को जबरन बाहर निकाल दिया। प्रत्याशी का आरोप है कि उन्हें मात्र 5 वोट से साजिशन हराया गया और प्रशासन ने निष्पक्ष सुनवाई नहीं की।प्रत्याशी और ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर अवनीश शरण ने सहमति जताई और पुनः मतगणना के आदेश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर अवनीश शरण ने इस पूरे मामले में फिर से रिकाउंटिंग करने की बात कहते हुए अपनी सहमति जाहिर की है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि निर्वाचन आयोग की लापरवाही के कारण मतदान प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। चुनाव में नामों की गड़बड़ी, मतगणना में उलटफेर और प्रशासन की मनमानी से यह सवाल उठता है कि क्या चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है? यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक प्रणाली पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।

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