सक्ती के जोबा आश्रम में मिला दुर्लभ ताम्रपत्र, तंत्र साधना और प्राचीन इतिहास से जुड़ सकते हैं रहस्य

सक्ती जिले के जोबा आश्रम में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक ताम्रपत्र मिलने से क्षेत्र में उत्सुकता बढ़ गई है। ताम्रपत्र पर उत्कल लिपि में लेख अंकित हैं, जिनका संबंध प्राचीन तंत्र साधना और आध्यात्मिक परंपराओं से होने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इसके संरक्षण और अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रशासन ने शुरू की जांच और अध्ययन की तैयारी
ताम्रपत्र की सूचना मिलने पर डिप्टी कलेक्टर अरुण कुमार सोम अपनी टीम के साथ जोबा आश्रम पहुंचे और इस ऐतिहासिक धरोहर का अवलोकन किया। प्रशासन अब इसके ऐतिहासिक महत्व और वास्तविकता को समझने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी कर रहा है।
आश्रम प्रमुख स्वामी दिव्यानंद ओम महाराज ने बताया कि यह ताम्रपत्र उन्हें गुरु परंपरा से प्राप्त हुआ है और कई वर्षों से आश्रम में सुरक्षित रखा गया है। हालांकि इसकी वास्तविक आयु से जुड़ा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी बनावट और लेखन शैली इसे बेहद प्राचीन और दुर्लभ बनाती है।
प्राचीन ज्ञान और तंत्र साधना का हो सकता है संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार प्राचीन काल में ताम्रपत्रों का उपयोग धार्मिक ग्रंथों, तंत्र साधना, राजकीय आदेशों और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था। उत्कल लिपि में लिखे गए इस ताम्रपत्र से क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
पुरातत्व विषय के जानकारों का मानना है कि यदि इसका वैज्ञानिक परीक्षण और विस्तृत अध्ययन कराया जाता है, तो इसकी वास्तविक आयु और उद्देश्य का पता लगाया जा सकेगा।
सांस्कृतिक विरासत के रूप में उभर सकता है ताम्रपत्र
जिला प्रशासन की ओर से संरक्षण की पहल को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल उसके विकास से नहीं, बल्कि उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से भी होती है।
जोबा आश्रम लंबे समय से सेवा, साधना और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। ऐसे में यह दुर्लभ ताम्रपत्र सक्ती जिले की ऐतिहासिक पहचान को नई दिशा दे सकता है और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।





