AAP को बड़ा झटका—राघव चड्ढा समेत 3 सांसद BJP में शामिल, अब दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की तैयारी

आम आदमी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
AAP का एक्शन प्लान तैयार
AAP नेता संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि पार्टी इन तीनों सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इन नेताओं को अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी।
क्या है 10वीं अनुसूची?
भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची, जिसे एंटी-डिफेक्शन लॉ कहा जाता है, 1985 में लागू किया गया था। इसके तहत अगर कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ता है या पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।
हालांकि इसमें एक बड़ा अपवाद भी है—अगर किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल सकती है।
कानूनी पेच और बहस
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला जटिल हो सकता है। यदि इसे ‘विलय’ माना जाता है और दो-तिहाई सदस्यों की शर्त पूरी होती है, तो अयोग्यता से बचाव संभव है। अंतिम फैसला राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी के पास होगा।
नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग
AAP ने इस घटनाक्रम को “ऑपरेशन लोटस” करार दिया है। अरविंद केजरीवाल ने इसे “पंजाबियों के साथ धोखा” बताया, जबकि मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने बागी नेताओं को “गद्दार” तक कह दिया।
वहीं, राघव चड्ढा ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और अब वह निजी हितों के लिए काम कर रही है।
अब इस पूरे मामले में नजर राज्यसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि यह दलबदल है या वैध विलय।





