पश्चिम एशिया संकट: भारतीय यात्रियों की वतन वापसी के लिए 58 विशेष उड़ानें शुरू, हवाई किरायों में भारी उछाल

दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पश्चिम एशिया के आसमान को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। अधिकांश क्षेत्रीय एयरस्पेस (वायु क्षेत्र) बंद या प्रतिबंधित होने के बावजूद, भारत सरकार ने वहां फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, 4 मार्च को भारतीय एयरलाइनों ने खाड़ी देशों से कुल 58 विशेष उड़ानों का संचालन किया। इस बचाव अभियान में प्रमुख भूमिका निभाते हुए इंडिगो ने अकेले 30 उड़ानों का संचालन किया। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मिलकर 23 उड़ानें भेजीं। ये उड़ानें दुबई और फुजैराह जैसे खाड़ी शहरों से उड़ान भरकर नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोच्चि और तिरुअनंतपुरम जैसे भारतीय शहरों में पहुंच रही हैं। एअर इंडिया विशेष रूप से जेद्दा से मुंबई और दिल्ली के लिए अपनी नियमित सेवाएं फिर से शुरू करने की योजना बना रही है ताकि फंसे हुए यात्रियों को राहत मिल सके।

प्रतिबंधित एयरस्पेस और वैकल्पिक मार्ग

युद्ध के कारण पश्चिम एशिया का एयरस्पेस असुरक्षित हो गया है। भारतीय एयरलाइनें अब प्रतिबंधित क्षेत्रों से बचते हुए वैकल्पिक और लंबे मार्गों का उपयोग कर रही हैं। हालांकि दुबई का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुला है, लेकिन यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे केवल एयरलाइन के सीधे संपर्क के बाद ही हवाई अड्डे पर पहुंचें।

हवाई किराए में 100 प्रतिशत की वृद्धि

संकट का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ा है। पश्चिम एशिया के हवाई गलियारे बंद होने से भारत और अमेरिका के बीच उड़ानों का समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। न्यूयॉर्क-दिल्ली मार्ग  इस रूट पर किराए में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। जो टिकट सामान्यत  45,000 से ₹1 लाख के बीच मिलता था, वह अब ₹1.34 लाख से ₹2.25 लाख तक पहुंच गया है। इसी तरह शिकागो और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों के बीच भी स्पॉट फेयर (तत्काल किराया) दोगुना हो गया है।

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