महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध पर सख्त हुआ कानून, झूठे वादे से शारीरिक संबंध बनाने पर भी सजा

देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में कई सख्त प्रावधान किए गए हैं। नए कानून में पहली बार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को विशेष प्राथमिकता देते हुए एक अलग अध्याय में शामिल किया गया है।
नए प्रावधानों के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ गैंगरेप के मामले में दोषी को आजीवन कारावास या मौत की सजा तक का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही शादी, नौकरी या प्रमोशन का झूठा वादा करके या पहचान छिपाकर शारीरिक संबंध बनाने को भी अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।
सरकार के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत ट्रायल, पूछताछ, समन और वारंट जारी करने, गवाहों के बयान दर्ज करने और सबूतों को रिकॉर्ड करने जैसी प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग किया जा सकेगा। ऑडियो-वीडियो तकनीक के जरिए भी कई प्रक्रियाएं पूरी की जा सकेंगी।
इसके लिए ई-समन, ई-साक्ष्य और न्याय-श्रुति जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। ई-समन के जरिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समन की डिलीवरी आसान होगी, जबकि ई-साक्ष्य डिजिटल सबूतों के सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से संग्रह और प्रस्तुति में मदद करेगा। न्याय-श्रुति प्लेटफॉर्म के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों और विशेषज्ञों की वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकेगी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानून में कई अतिरिक्त प्रावधान भी जोड़े गए हैं। गैंगरेप के मामलों में नाबालिग पीड़िताओं के लिए उम्र के अलग-अलग वर्ग खत्म कर दिए गए हैं और 18 साल से कम उम्र की किसी भी लड़की के साथ गैंगरेप के लिए समान सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।
कानून में यह भी व्यवस्था की गई है कि पीड़िता का बयान ऑडियो और वीडियो दोनों माध्यमों से रिकॉर्ड किया जाएगा। जहां संभव हो, बयान किसी महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा और यदि महिला मजिस्ट्रेट उपलब्ध न हो तो पुरुष मजिस्ट्रेट महिला की मौजूदगी में बयान दर्ज करेंगे, ताकि पीड़िता को सुरक्षित माहौल मिल सके।
रेप पीड़िता की मेडिकल जांच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर जांच अधिकारी को सौंपना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, गंभीर बीमारी से ग्रस्त या शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों को बयान देने के लिए उनके निवास स्थान से बाहर जाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
नए कानून में महिलाओं को परिवार के वयस्क सदस्य के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे वे समन प्राप्त कर सकेंगी। पहले इस व्यवस्था में केवल वयस्क पुरुष सदस्य का उल्लेख किया जाता था।
इसके अलावा किसी अपराध को अंजाम देने के लिए बच्चों को काम पर रखना भी अब अपराध माना गया है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर कम से कम सात साल की जेल की सजा होगी, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य आपराधिक गतिविधियों में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
नए नियमों के तहत सभी अस्पतालों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के पीड़ितों को मुफ्त प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि पीड़ितों को तुरंत मदद मिल सके।





