Women’s Power: ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम: अब ‘नीति की लाभार्थी’ नहीं, ‘नीति निर्माता’ बनेंगी देश की बेटियाँ
नारी शक्ति का शंखनाद: 33% आरक्षण से बदलेगी सियासत की सूरत,

बिलासपुर भाजपा प्रदेश कार्यालय के निर्देश पर आज मुंगेली नाका स्थित न्यू सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता (Women’s Power) का आयोजन किया गया। यह वार्ता ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने के लिए बुलाई गई थी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश भाजपा मंत्री हर्षिता पांडे, महापौर पूजा विधानी और महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री शीलू साहू मौजूद रहीं। शहर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष स्नेहलता शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने केंद्र सरकार के इस फैसले को महिलाओं के सर्वांगीण विकास और राजनीति में उनकी समान भागीदारी के लिए एक युगांतरकारी कदम बताया……
भाजपा महिला मोर्चा ने गिनाईं उपलब्धियां (Women’s Power)
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का नया अध्याय है। यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें सुनिश्चित कर उन्हें निर्णय लेने वाली मुख्य भूमिका में खड़ा करेगा।
वक्ताओं ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज 72% घर महिलाओं के नाम पर हैं और मुद्रा योजना के 69% ऋण का लाभ भी महिलाओं ने उठाया है। अब यही महिलाएं संसद और विधानसभाओं में बैठकर देश की नीतियां तैयार करेंगी, जिससे शासन की प्राथमिकताओं में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों को और अधिक बल मिलेगा……
भाजपा महिला मोर्चा ने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यदि लैंगिक अंतर कम होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन तक की वृद्धि संभव है। भारत इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जहाँ आज 43% STEM ग्रेजुएट महिलाएं हैं और लगभग 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
वक्ताओं ने पंचायती राज संस्थाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पंचायतों में 46% महिला प्रतिनिधित्व ने ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाया है, ठीक उसी तरह यह आरक्षण नीति निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उज्ज्वला योजना से लेकर जल जीवन मिशन तक की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तभी एक सशक्त समाज और समर्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है……





