महिला आरक्षण बिल पर संसद में घमासान, समर्थन के साथ परिसीमन पर बड़ा टकराव

संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर जोरदार बहस और सियासी टकराव देखने को मिला। जहां लगभग सभी विपक्षी दलों ने महिलाओं को 33% आरक्षण देने का समर्थन किया, वहीं बिल को परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण से ज्यादा सत्ता में बने रहने की रणनीति है। उनका आरोप था कि परिसीमन के जरिए चुनावी नक्शा बदलकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस आरक्षण में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन सरकार इसे अनावश्यक रूप से जटिल बना रही है। उन्होंने मांग की कि इसे मौजूदा 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जाए, न कि जनगणना और परिसीमन से जोड़ा जाए।
वहीं AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को “संघीय ढांचे के खिलाफ” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करना और ओबीसी प्रतिनिधित्व को कमजोर करना है।
कांग्रेस के के. सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी बिल के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार संविधान संशोधन के जरिए परिसीमन को प्राथमिकता देकर लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ रही है।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण को लेकर समर्थन तो व्यापक है, लेकिन उसे लागू करने के तरीके—खासकर परिसीमन से जोड़ने—पर सत्ता और विपक्ष के बीच गहरी खाई साफ दिखाई दे रही है। संसद में इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और तीखी बहस की संभावना है।





