नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन

नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को व्यापक प्रदर्शन हुए जब सरकार ने व्हाट्सएप, फेसबुक, X और यू ट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया। युवाओं ने संसद के अवरोध को तोड़कर अंदर घुस गए और पूरा शहर हंगामे में बदल गया। लोगों का कहना था कि सरकार ने यह प्रतिबंध सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को रोकने के लिए लगाया है, जिससे विदेशों में रहने वाले उनके रिश्तेदारों से संपर्क टूट गया।
नेपाल की भूगोलिक और आर्थिक स्थिति भी इस तनाव का कारण बनी। यह देश दो बड़े और आर्थिक रूप से समृद्ध देशों से घिरा हुआ है, जिनके साथ इसके संबंध हमेशा संतोषजनक नहीं रहे। नेपाल में रोजगार कम हैं और अधिकांश लोग विदेशों में जाकर जीवनयापन करते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध ने आम जनता की जीवन शैली और रोजगार के साधनों को सीधे प्रभावित किया।
नेपाल सरकार ने 2023 में सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाए थे, लेकिन अमेरिकी कंपनियों ने उनका पालन नहीं किया। जबकि चीन का टिक-टॉक नियम मान गया और उसे फिर से खोल दिया गया। 28 अगस्त को नेपाल सरकार ने डेडलाइन दी थी, लेकिन 3 सितंबर को कई सोशल साइट्स प्रतिबंधित कर दी गईं। इसका सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ा, जिन्होंने अपनी आज़ादी और अभिव्यक्ति के अधिकार के लिए प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया नेपाल में सिर्फ मनोरंजन या सूचना का साधन नहीं है, बल्कि युवाओं में विचारों की स्वतंत्रता और विरोध की भावना को बढ़ाने वाला प्लेटफॉर्म है। नेपाल की नई पीढ़ी स्वतंत्र अभिव्यक्ति के महत्व को समझती है और यही कारण है कि प्रतिबंध के खिलाफ इतना बड़ा विरोध हुआ।
सरकार ने जनता को भरोसे में नहीं लिया और बिना किसी समझाइश के प्रतिबंध लागू कर दिया, जिससे जनता का गुस्सा भड़क गया। अमेरिका ने भी नेपाल के वीज़ा नियम कड़े कर दिए और इसे संरक्षित देश का दर्जा खत्म कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया कि नेपाल अब छोटा और असहाय देश नहीं है; उसकी नई पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए निर्णायक कदम उठा सकती है।
इस प्रदर्शन से यह भी स्पष्ट हुआ कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म अब विरोध और संवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।





