भगवान जगन्नाथ को क्यों लगाया जाता है मालपुए का भोग? जानें कहां से आता है यह प्रसाद

पुरी, 15 जून 2025
पुरी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा 27 जून से आरंभ होने जा रही है। इस पावन अवसर पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें भगवान को विशेष रूप से मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भक्ति और श्रद्धा से जुड़ी गहराई को भी दर्शाती है।
कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ को मालपुआ अत्यंत प्रिय है। हर वर्ष रथ यात्रा की शुरुआत से पहले, भगवान जगन्नाथ को यह मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद ही वह अपनी यात्रा पर अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ निकलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान अपने मासी (मौसी) के घर जाते हैं और इस यात्रा का आरंभ विशेष पूजा और भोग से होता है।
इस परंपरा को निभाने में खलासी समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। रथ यात्रा की तैयारी के दौरान, भक्तगण दूर-दूर से पुरी पहुंचते हैं और भगवान के दर्शन तथा प्रसाद पाने की लालसा लेकर कतारों में खड़े रहते हैं।
सबसे खास बात यह है कि भगवान को अर्पित किया जाने वाला मालपुआ छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से विशेष रूप से मंगाया जाता है। इस अवसर पर बना मालपुआ केवल यात्रा वाले दिन ही तैयार होता है और भगवान को अर्पण करने के बाद भक्तों में वितरित किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान को यह भोग प्रसन्नता और शुभता का प्रतीक मानकर अर्पित किया जाता है। हालांकि यह परंपरा आस्था पर आधारित है, लेकिन इसमें छिपा भाव और समर्पण इसे विशिष्ट बनाता है।





